मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी दलों ने प्रस्ताव लाने के संदर्भ में शुक्रवार को राज्यसभा को नया नोटिस सौंपा है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने बताया कि संसद के उच्च सदन के 73 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला यह नोटिस राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी को दिया गया है। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "राज्यसभा के 73 विपक्षी सदस्यों ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 15 मार्च, 2026 को और उसके बाद किए गए कृत्यों और चूक के आधार पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के साथ पठित अनुच्छेद 124 (4), धारा 11 (2) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत पद से हटाने की प्रार्थना करते हुए प्रस्ताव का नोटिस राज्यसभा महासचिव को सौंपा है।"
सीईसी ज्ञानेश कुमार (फोटो: पीटीआई)
पहले प्रस्ताव को किया गया था खारिज
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष 12 मार्च को भी हटाने का प्रस्ताव लाया था। उस प्रस्ताव पर 130 लोकसभा और 63 राज्यसभा सांसदों समेत कुल 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। लेकिन 6 अप्रैल को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे खारिज कर दिया था। दोनों पीठासीन अधिकारियों ने कहा था कि विपक्ष दुराचार के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दे पाया। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने के लिए ऊंची संवैधानिक कसौटी पूरी करनी होती है।
विपक्ष ने लगाए थे सात आरोप
विपक्ष ने पहले नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी धांधली की जांच रोकने, मतदाता सूची से नाम हटाने और कुछ दलों को फायदा पहुंचाने जैसे सात गंभीर आरोप लगाए थे। बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष नए नोटिस में कुछ नए आरोप भी जोड़ सकता है। महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन से जुड़े विधेयक पर सरकार को घेरने के बाद विपक्ष इस मुद्दे पर भी आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है।
CEC को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी कठिन मानी जाती है। संसद की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी जाती है। अब तक यह प्रक्रिया किसी CEC के मामले में आगे नहीं बढ़ी है। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है और राज्यसभा में जल्द औपचारिक पहल हो सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
