उच्चतम न्यायालय में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कार्यवाही के दौरान अधिवक्ता राकेश किशोर ने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की ओर जूता उछालने की कोशिश की। अदालत में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। इस घटना के बावजूद सीजेआई ने संयम बनाए रखा और वकीलों से कार्यवाही जारी रखने का आग्रह किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी वकील मयूर विहार निवासी है और उसने मंच के पास जाकर अपना जूता निकालकर न्यायाधीशों की ओर फेंकने का प्रयास किया। घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। आरोपी वकील का वकालत का लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया है।
सीजेआई पर वकील ने की जूते से हमले की कोशिश (फोटो- PTI)
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट में वकील ने किया हंगामा, CJI पर जूता फेंकने की कोशिश, जस्टिस गवई बोले- इन चीजों का मुझ पर कोई असर नहीं
सोनिया गांधी ने की निंदा
घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और संविधान पर हमला बताया। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा कि प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई पर ‘‘हमला’’ सिर्फ उनपर नहीं, बल्कि संविधान पर भी हमला है। सोनिया ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश पर हुए हमले की निंदा करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं हैं। यह न केवल उनपर (सीजेआई पर), बल्कि हमारे संविधान पर भी हमला है। प्रधान न्यायाधीश गवई बहुत सहृदय हैं, लेकिन राष्ट्र को गहरी पीड़ा और आक्रोश के साथ एकजुट होकर उनके साथ खड़ा होना चाहिए।’’
राहुल-प्रियंका ने संविधान की भावना पर हमला बताया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, “प्रधान न्यायाधीश पर हमला हमारी न्यायपालिका की गरिमा और संविधान की भावना पर प्रहार है। देश में इस तरह की घृणा के लिए कोई जगह नहीं है।” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इसे “अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ सीजेआई पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान, न्याय व्यवस्था और कानून के शासन पर हमला है। न्यायपालिका और लोकतंत्र — दोनों के लिए यह घातक है।”
क्या बोले स्टालिन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, “प्रधान न्यायाधीश पर हुआ यह हमला लोकतंत्र की सर्वोच्च न्यायिक संस्था पर प्रहार है। गवई ने जिस तरह संयम और शालीनता से प्रतिक्रिया दी, वह संस्था की ताकत को दर्शाता है।” उन्होंने जोड़ा कि “हमलावर की मानसिकता हमारे समाज में अब भी मौजूद दमनकारी सोच को उजागर करती है।”
अखिलेश का ट्वीट
अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा- "कुछ लोगों के हाथ में जाकर तो जूता भी अपमानित महसूस करता है। पीडीए समाज का अपमान करनेवाले ऐसे असभ्य लोग दरअसल अपने दंभ और अहंकार के मारे होते हैं। इनकी प्रभुत्ववादी सोच नफ़रत को जन्म देती है, जो देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए जितनी होती है, उतनी ही समाज के सबसे कमज़ोर अंतिम व्यक्ति के लिए भी। ऐसे लोग वर्चस्ववाद की बीमारी से घोर ग्रसित होते हैं। हम इसलिए कहते हैं, पीडीए का मतलब है ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’।"
