Nitin Gadkari Missing Link Project Controversy: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को पुणे में आयोजित 'फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स' व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए देश के सड़क बुनियादी ढांचे, तकनीक के इस्तेमाल और पुणे के लिए आगामी विकास परियोजनाओं पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की सराहना करते हुए 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट पर हुए विवाद पर स्थिति साफ की।
27 साल बाद भी गड्ढा-मुक्त है मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे
बता दें कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 6-7 घंटे से घटकर महज 2 से 2.5 घंटे रह गया है। उन्होंने कहा कि इतनी बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर की सकारात्मक खबरें मीडिया में अक्सर रिपोर्ट नहीं की जाती हैं।
मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट पर सोशल मीडिया आलोचना का सच
'मिसिंग लिंक' परियोजना को लेकर हुए विवाद और सोशल मीडिया पर अपनी आलोचना पर गडकरी ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान वन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बाद में इस सड़क का निर्माण महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा कराया गया। गडकरी ने कहा कि जब सड़क में कमियां आईं, तो सोशल मीडिया पर उन्हें बेवजह निशाना बनाया गया।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट बेहद अहम है, जिसे 1 मई को खोला गया था। करीब 13 किलोमीटर का यह लंबा मार्ग पहाड़ों से होकर गुजरता है और इशमें 2 जुड़वां सुरंगों के साथ एक केबल स्टे पुल भी शामिल है। इससे मुंबई और पुणे के बीच 5.7 किलोमीटर कम होने और यात्रा के समय में 20 से 30 मिनट तक की कमी आने का दावा किया गया था। हालांकि, मानसून की बारिश में उद्घाटन के लगभग 9 हफ्ते बाद यह मार्ग प्रभावित हो गया। सड़क की गुणवत्ता को लेकर विपक्ष के साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स के भी निशाने पर नितिन गड़करी आ गए थे।
तकनीक और AI से सड़कों की निगरानी
गडकरी ने बताया कि इंफ्रास्ट्रक्चर में अब टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है। सरकार ने ऐसी गाड़ियां विकसित की हैं जो सीधे सैटेलाइट से जुड़कर सड़कों की स्थिति का विस्तृत डेटा प्रदान करती हैं। AI के जरिए सड़कों की खराबियों का तेजी से पता लगाया जा रहा है। इसके साथ ही सोशल मीडिया से भी अधिकारियों को सड़कों की समस्याओं को तुरंत चिह्नित करने में मदद मिल रही है।
पुणे को क्या मिला?
लोगों को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि अगले दो सालों में पुणे में 60,000 करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम होगा। अधिकारी शहर के शहरी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि पुणे IT, मैन्युफैक्चरिंग और रोज़गार के लिए एक बड़े केंद्र के तौर पर उभरा है, लेकिन तेजी से हो रहे विकास की वजह से ट्रैफिक जाम, आने-जाने में ज्यादा समय लगने और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं।
गडकरी ने कहा कि मुंबई और पुणे के बीच यात्रा में पहले छह से सात घंटे लगते थे, लेकिन मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ने इस यात्रा के समय को घटाकर लगभग दो से ढाई घंटे कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी क्वालिटी वाली सड़कों के लिए लोगों को टोल देना होगा।
