हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में बनाई जाएगी एनआईए अदालत; केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

केंद्र सरकार ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में एनआईए की एक समर्पित अदालत स्थापित करने का फैसला लिया है।

आतंकवाद से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। इस बाबत देश के हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को समर्पित अदालत स्थापित करने का फैसला लिया गया है।केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को इस बात की जानकारी दी। साथ ही केंद्र ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि जिन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत 10 से अधिक मामले लंबित हैं, वहां एक से अधिक विशेष एनआईए अदालतें स्थापित की जाएंगी। वहीं, दिल्ली सरकार ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी में 16 विशेष अदालतें गठित की जा रही हैं, जो तीन महीने में काम शुरू कर देंगी।

सुप्रीम कोर्ट

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एनसीआर में मकोका जैसे कड़े कानून पर विचार का सुझाव

पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार के टकराव से बचने के लिए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) जैसा सख्त कानून लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।

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