ऐप से कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी या दूसरी डिजिटल ट्रांसपोर्ट सेवाएं लेने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं। आयोग का मकसद है कि महिला की सुरक्षा सिर्फ कैब बुक होने तक सीमित न रहे, बल्कि सवारी शुरू होने से लेकर मंजिल तक पहुंचने और शिकायत होने की स्थिति तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए NCW की नई गाइडलाइन
NCW ने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर इन गाइडलाइंस को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसके लिए परिवहन विभाग में नोडल अधिकारी तय करने और परिवहन विभाग, RTO, पुलिस और कैब एग्रीगेटर्स के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है।
ड्राइवर और गाड़ी वही होनी चाहिए, जो ऐप पर दिखाई गई है
महिला ने ऐप पर जिस ड्राइवर और गाड़ी को बुक किया है, वही उसके पास पहुंचे। ड्राइवर या गाड़ी बदलने की स्थिति को सुरक्षा से जुड़ा मामला माना जाएगा। ऐप पर इसकी जानकारी साफ दिखाई जानी चाहिए। अगर ऐप पर दिखाए गए ड्राइवर या गाड़ी की जगह कोई दूसरा ड्राइवर या वाहन पहुंचता है तो महिला को बिना कैंसिलेशन चार्ज दिए राइड कैंसिल करने की सुविधा देने की सिफारिश की गई है।
ड्राइवर का बैकग्राउंड चेक जरूरी
कैब कंपनियों को ड्राइवर को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने से पहले उसके पुलिस वेरिफिकेशन, आपराधिक रिकॉर्ड और बैकग्राउंड की जांच करनी होगी। जरूरत के मुताबिक ड्राइवरों का समय-समय पर दोबारा वेरिफिकेशन भी किया जा सकता है।
ड्राइवरों को महिलाओं के साथ व्यवहार की ट्रेनिंग
ड्राइवरों के लिए सिर्फ ड्राइविंग ट्रेनिंग काफी नहीं होगी। उन्हें जेंडर सेंसिटाइजेशन, महिलाओं के साथ उचित व्यवहार, व्यक्तिगत सीमाओं, यौन उत्पीड़न की रोकथाम और इमरजेंसी में क्या करना है, इसकी ट्रेनिंग देने पर जोर दिया गया है। NCW ने कहा है कि यह ट्रेनिंग सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म भरने या खानापूर्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण भी होना चाहिए।
महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प
एग्रीगेटर्स को कोशिश करनी चाहिए कि उनके पास वेरिफाइड महिला ड्राइवरों का एक पूल हो। उपलब्धता होने पर अकेले सफर कर रही महिलाओं को ऐप पर महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प दिया जा सकता है।
रात में सफर करने वाली महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षा
देर रात सफर के दौरान ड्राइवर और वाहन की अतिरिक्त जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। ट्रिप शुरू होने पर ड्राइवर की फोटो वेरिफिकेशन, ड्राइवर के नशे में होने की जांच, ट्रिप की जानकारी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ शेयर करने की सुविधा और सेफ-ड्रॉप जैसी व्यवस्था पर जोर दिया गया है।रास्ता बदलने पर तुरंत अलर्ट
अगर कैब तय रास्ते से अचानक या बिना वजह काफी दूर जाती है तो ऐप को इसका पता लगाना चाहिए। ऐसी स्थिति में महिला यात्री और कंपनी दोनों को रियल टाइम अलर्ट मिलना चाहिए, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके। इसी तरह अगर गाड़ी किसी जगह पर लंबे समय तक रुकती है या उसकी गतिविधि असामान्य दिखाई देती है, खासकर किसी सुनसान या संवेदनशील जगह पर, तो कंपनी की ओर से सुरक्षा जांच शुरू की जा सकती है।
24 घंटे कमांड सेंटर और SOS पर तुरंत मदद
कैब कंपनियों के पास 24x7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होना चाहिए, जहां महिलाओं की SOS या इमरजेंसी शिकायत तुरंत पहुंच सके। NCW की गाइडलाइन में 60 सेकेंड के भीतर SOS पर प्रतिक्रिया देने का अतिरिक्त सुझाव दिया गया है। जरूरत पड़ने पर कमांड सेंटर पुलिस से भी संपर्क कर सकेगा।
कैब में फिजिकल SOS बटन
महिला यात्री की पहुंच में कैब के अंदर फिजिकल SOS बटन होना चाहिए। बटन दबाते ही कमांड सेंटर को अलर्ट मिल सके और जरूरत के मुताबिक लाइव लोकेशन और ट्रिप की जानकारी साझा की जा सके।
इमरजेंसी में पूरी जानकारी पुलिस तक
अगर किसी घटना में पुलिस या दूसरी इमरजेंसी एजेंसी की मदद जरूरी हो तो बुकिंग डिटेल, ड्राइवर की पहचान, गाड़ी का नंबर और यात्री की लोकेशन संबंधित इमरजेंसी कॉन्टैक्ट और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ कानून के मुताबिक साझा की जा सकती है।
कैब में कोई अनजान यात्री नहीं जोड़ा जाए
पूल कैब की स्थिति में यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई अनधिकृत यात्री गाड़ी में न जोड़ा जाए। जरूरत के मुताबिक ऐप पर सहयात्रियों की वेरिफाइड जानकारी भी दिखाई जा सकती है, लेकिन इसमें प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का ध्यान रखना होगा।
बुजुर्ग महिलाओं के लिए विशेष मदद
अकेले सफर करने वाली वरिष्ठ महिला यात्रियों के लिए ऐप में ऐसी सुविधा दी जा सकती है, जिससे ड्राइवर को पता हो कि यात्री को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। ड्राइवर से यह भी अपेक्षा की जा सकती है कि वह महिला के सुरक्षित तरीके से गाड़ी में बैठने या गाड़ी से उतरने तक इंतजार करे।
सुनसान जगह पर महिला को नहीं उतार सकेंगे
राइड को किसी सुनसान, असुरक्षित या अनधिकृत जगह पर खत्म नहीं किया जाना चाहिए। सामान्य तौर पर महिला को उसी जगह उतारा जाए जो उसने ऐप में डेस्टिनेशन के तौर पर चुनी है। अगर किसी वास्तविक वजह से जगह बदलनी पड़े तो महिला को इसकी जानकारी दी जाए और संभव हो तो ऐप के जरिए नई जगह की पुष्टि की जाए। रात में अकेली महिला के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।
शिकायत पर 2 घंटे में जवाब, 72 घंटे में समाधान का सुझाव
महिलाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग और समयबद्ध व्यवस्था बनाने की सिफारिश की गई है। शिकायत मिलने के 2 घंटे के भीतर उसकी पुष्टि और 72 घंटे के भीतर समाधान का सुझाव दिया गया है। गंभीर या संज्ञेय अपराध की स्थिति में शिकायत को पुलिस तक पहुंचाया जाए।
सुरक्षा से जुड़ी शिकायत में ट्रिप की जरूरी इलेक्ट्रॉनिक जानकारी को कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने की भी सिफारिश की गई है, कानून और डेटा प्रोटेक्शन नियमों के अधीन।
गंभीर शिकायत सीधे पुलिस तक
अगर शिकायत में ऐसा मामला सामने आता है जिसमें पुलिस की कार्रवाई जरूरी है, तो एग्रीगेटर को उसे संबंधित पुलिस या कानून-प्रवर्तन एजेंसी तक पहुंचाना होगा। महिला को यह भी बताया जाना चाहिए कि वह आगे किस प्रक्रिया और कानूनी उपाय का इस्तेमाल कर सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखे जाएं
किसी सुरक्षा शिकायत के बाद कंपनी को उस सफर से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने चाहिए। इनमें बुकिंग डिटेल, ड्राइवर की जानकारी, गाड़ी का नंबर, ट्रिप और लोकेशन डेटा शामिल हो सकते हैं। गाइडलाइन में खास तौर पर वाहनों में डैश कैमरा लगाने पर भी विचार करने की बात कही गई है, ताकि सड़क पर होने वाली घटनाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके।
कंपनियों को सुरक्षा का रिकॉर्ड रखना होगा
एग्रीगेटर्स को महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों का समय-समय पर रिव्यू करना होगा। इसमें शिकायतें, SOS अलर्ट, ड्राइवर से जुड़ी गड़बड़ियां, सुरक्षा घटनाएं और उन पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड रखा जा सकता है।
सुरक्षा नियमों की लगातार समीक्षा
सुरक्षा के नियम एक बार बनाकर छोड़ नहीं दिए जाएंगे। कंपनियों को घटनाओं, शिकायतों और नई तकनीक के आधार पर अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल और SOPs की समय-समय पर समीक्षा और अपडेट करना होगा।
NCW का साफ संदेश-महिला की सुरक्षा पूरी यात्रा की जिम्मेदारी
NCW की इन गाइडलाइंस का सबसे बड़ा फोकस यही है कि महिला की सुरक्षा सिर्फ कैब बुक करने या ऐप पर ड्राइवर की जानकारी दिखाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बुकिंग से पहले ड्राइवर की जांच, गाड़ी में बैठने के बाद निगरानी, रास्ते में रूट डाइवर्जन पर अलर्ट, इमरजेंसी में SOS और पुलिस की मदद, सुरक्षित जगह पर ड्रॉप और शिकायत के बाद समयबद्ध कार्रवाई—पूरी यात्रा को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।NCW अध्यक्ष विजया राहतकर ने कहा कि महिलाएं चाहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें या ऐप आधारित मोबिलिटी, उन्हें बिना डर और पूरी गरिमा के सफर करने का अधिकार है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ महिला सुरक्षा को इस व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा बनाना जरूरी है।
