मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत पहुंच गई है। ममता बनर्जी की ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (MAITC) सांसद महुआ मोइत्रा ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है। महुआ मोइत्रा ने ये शिकायत उस रिपोर्ट के बाद की है, जिसमें आरोप लगा है ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में मनमानी कर रहे हैं।
महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दी शिकायत (फाइल फोटो- PTI)
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महुआ मोइत्रा का आरोप
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, "मैं आज भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन आई हूं, जिन्होंने आपराधिक आचरण किया है। यह आपराधिक आचरण क्या है? शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग तीन चुनाव आयुक्तों से मिलकर बनता है, जहां बहुमत के फैसले मान्य होते हैं। अब कल की 'द इंडियन एक्सप्रेस' की खोजी रिपोर्ट से यह साबित हो गया है कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों-यानी मिस्टर जोशी और मिस्टर संधू-ने पिछले 10 महीनों में 14 मौकों पर ज्ञानेश कुमार के कदमों का विरोध (असहमति व्यक्त) किया था, और कभी-कभी तो एक ही दिन में चार-चार बार विरोध किया।"
ज्ञानेश कुमार पर और क्या-क्या आरोप लगे?
उन्होंने आगे कहा, "आईटी सॉफ्टवेयर का केंद्रीकरण जैसी बेहद अहम चीजों को पूरी तरह से डीजी आईटी सीमा खन्ना के हाथों में छोड़ दिया गया था, जो इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल जमीनी स्तर के स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार करने के लिए कर रही थीं। नियम क्या है? नियम यह है कि हर विधानसभा क्षेत्र और हर बूथ पर मतदाता सूची का प्रभार स्थानीय अधिकारी, ईआरओ (ERO) और बीएलओ (BLO) के पास होता है। लेकिन हमने पाया कि सीमा खन्ना और ज्ञानेश कुमार ने ईसीआई (ECI) सॉफ्टवेयर का अवैध और आपराधिक तरीके से इस्तेमाल करके मतदाता सूचियों में हेरफेर की, स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार किया और उन्हें सिस्टम का एक्सेस तक नहीं दिया।"
फॉर्म 6 पर भी आरोप
उन्होंने आगे कहा, "दूसरी बात, फॉर्म 6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की अनुमति देता है। एक नया मतदाता फॉर्म 6 भरकर कैसे नामांकित होता है? ज्ञानेश कुमार ने अवैध रूप से फॉर्म 6 में एक नया सवाल जोड़ दिया: 'क्या आप या आपके माता-पिता या दादा-दादी में से कोई एसआईआर (SIR) से जुड़ा है, हां या ना?' मिस्टर संधू और मिस्टर जोशी ने इस पर असहमति जताते हुए कहा कि केवल नियमों में संशोधन करके ही आप ऐसा कर सकते हैं; आप ऐसे ही अपनी मर्ज़ी से कोई सवाल नहीं जोड़ सकते। इसका जवाब कोई नहीं दे सका-न पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और ना ही मुख्य चुनाव आयुक्त। इसके चलते लाखों-करोड़ों नए मतदाता बाहर छूट गए। आज पूरे भारत में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उनके बच्चों का क्या होगा? जब वे 18 साल के होंगे तो उनके बच्चों का क्या होगा? वे भी मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सकेंगे। इसलिए यह एक आपराधिक आचरण है, और वे मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 के पीछे नहीं छिप सकते।"
