Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों के हंगामे के कारण गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के महज तीन मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में विपक्ष का हंगामा (फोटो- संसद टीवी)
कार्यवाही बाधित होने से सदन में न तो प्रश्नकाल हो सका और न ही शून्यकाल चल पाया। 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में यह लगातार 14वां दिन था जब विपक्षी हंगामे के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही पूरी तरह ठप रही।
हिरोशिमा-नागासाकी के पीड़ितों को दी गई श्रद्धांजलि
सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु बम हमले की बरसी का उल्लेख किया। अध्यक्ष ने 6 और 9 अगस्त 1945 को हुए इन हमलों की विभीषिका को याद करते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
इसके बाद, सदन में उपस्थित सभी सदस्यों ने कुछ देर मौन रखकर परमाणु हमले में मारे गए एक लाख से अधिक लोगों और विकिरण से प्रभावित पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
विपक्षी दलों की दो मुख्य मांगें
श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने के तुरंत बाद विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए हंगामा करने लगे। विपक्ष मुख्यतः दो मुद्दों पर सरकार को घेर रहा था। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर विपक्षी दल चर्चा और जांच की मांग कर रहे थे। दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में विपक्षी सदस्य गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल बयान देने की मांग दोहरा रहे थे।
लोकसभा अध्यक्ष का आग्रह
हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर जाने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "देश संसद को चर्चा और संवाद के लिए देखना चाहता है। देश की जनता आपके प्रश्नों और सरकार के उत्तर को सुनना चाहती है। आपसे आग्रह है कि अपनी-अपनी सीट पर जाएं। मैं सदन चलाना चाहता हूं।"
उन्होंने विपक्ष के आचरण पर सवाल उठाते हुए आगे कहा कि रोजाना नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा करना और सदन की गरिमा को गिराना अच्छी परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा कि देश संसद के भीतर सदस्यों के इस आचरण को देख रहा है।
लगातार 14वें दिन भी नहीं हो सकी चर्चा
स्पीकर की अपील और सख्त टिप्पणियों के बावजूद जब विपक्षी सदस्यों का शोर-शराबा और नारेबाजी नहीं थमी, तो अध्यक्ष ने 11 बजकर 3 मिनट पर ही सदन की बैठक को अपराह्न 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। संसद सत्र की शुरुआत से ही जारी इस राजनीतिक खींचतान के कारण आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और सवाल-जवाब का सत्र एक बार फिर बाधित हो गया।
