Suvendu Adhikari आज पश्चिम बंगाल के नए और भाजपा की तरफ से पहले मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे हैं। पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल की कमान सौंपी है। सुवेंदु अधिकारी का संघर्ष काफी लंबा रहा है। लेकिन उनका भारतीय जनता पार्टी में आए उन्हें अभी पांच साल से कुछ ही ज्यादा समय हुआ है। दिसंबर 2020 में ही तो उन्होंने TMC का छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। सिर्फ पांच साल के अंतराल में ही वह मुख्यमंत्री की कुर्सी तक भी पहुंच गए। अकेले सुवेंदु अधिकारी ही नहीं दूसरी पार्टियों से भाजपा में आए कई ऐसे नेता हैं, जिन्हें पार्टी ने मुख्यमंत्री बनाया है। यहां उन सभी नेताओं के बारे में जानते हैं।
दूसरी पार्टियों से भाजपा में आए, BJP ने मुख्यमंत्री बना दिया
सम्राट चौधरी
बात अन्य पार्टियों से भाजपा में आए मुख्यमंत्रियों की हो रही है तो सबसे पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) का जिक्र होना जरूरी है। जिस तरह से सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, वैसे ही सम्राट चौधरी भी बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री हैं। हालांकि, यहां फर्क ये है कि बिहार में पार्टी NDA की अपनी सहयोगी JDU के साथ लंबे समय से सत्ता में है, जबकि पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता तक पहुंची है। सम्राट चौधरी ने 1990 में समता पार्टी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 1999 में वह लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए और तब उन्हें मंत्री भी बनाया गया। साल 2014 में सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार की JDU ज्वाइन की और जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री भी रहे। साल 2017 में उन्होंने JDU को भी छोड़ दिया और भाजपा का दामन थाम लिया। पार्टी में आने के 9 साल के भीतर ही भाजपा ने उन्हें बिहार का 'सम्राट' बना दिया।
अर्जुन मुंडा
भाजपा नेता अर्जुन मुंडा तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और उन्होंने केंद्र में भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। लेकिन अर्जुन मुंडा के राजनीतिक सफर की शुरुआत झारखंड मुक्ति मोर्चा से हुई थी। 1980 के दशक में अर्जुन मुंडा बिहार से अलग राज्य के रूप में चलाए जा रहे झारखंड आंदोलन में सक्रिए हुए और JMM से जुड़ गए। 1995 में जब झारखंड अलग भी नहीं हुआ था, वह जेएमएम की टिकट पर खरसावां से पहली बार बिधायक भी बने। साल 2000 में झारखंड अलग राज्य बन गया और इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा ने अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाया और वह राज्य के सबसे कम उम्र के CM बन गए। इसके बाद वह 2005 और 2010 में भी झारखंड के मुख्यमंत्री बने।
बसवराज बोम्मई
दक्षिण में जब भी भाजपा मजबूत हुई तो यह मजबूती कर्नाटक में ही दिखाई दी। कर्नाटक में भाजपा कई बार सरकार बना चुकी है। जुलाई 2021 में पार्टी ने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को हटाकर बसवराज बोम्मई को राज्य की कमान सौंपी, वह मई 2023 तक मुख्यमंत्री रहे। बता दें कि बोम्मई ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जनता दल से की थी। बाद के दिनों में वह जेडीयू में शामिल हुए। साल 2008 में भाजपा को कर्नाटक की सत्ता मिली तो बोम्मई ने जेडीयू का दामन छोड़कर भाजपा से नाता जोड़ लिया। वह येदियुरप्पा की सरकार में मंत्री भी रहे। बता दें कि बसवराज के पिता एसआर बोम्मई भी जनता पार्टी के बड़े नेता थे और साल 1988 में राज्य के मुख्यमंत्री भी बने थे।
सर्बानंद सोनोवाल
असम एक तरह से गुजरात की ही तरह भाजपा का गढ़ बन चुका है। साल 2016 में पहली बार यहां भाजपा की सरकार बनी। पार्टी ने राज्य में अपनी पहली सरकार की कमान किसी पुराने कार्यकर्ता तो देने की बजाय बाहर से आए सर्बानंद सोनोवाल को दे दी। बता दें कि सोनोवाल का राजनीतिक सफर ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन से शुरू हुआ था। बाद के दिनों में उन्होंने असम गण परिषद की सदस्यता ली। साल 2011 में उन्होंने असम गण परिषद का साथ छोड़कर भाजपा का झंडा थाम लिया और लगभग 5 साल बाद ही जब भाजपा को असम की सत्ता मिली तो पार्टी ने सोनोवाल को मुख्यमंत्री बना दिया।
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हिमंता विस्वा सरमा
असम में भाजपा ने सर्बानंद सोनोवाल के बाद एक और बाहर से आए नेता को मुख्यमंत्री बनाया। हिमंता विस्वा सरमा ने साल 2015 में कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का कमल थामा था। साल 2016 में सर्बानंद सोनोवाल की सरकार में हिमंता विस्वा सरमा को मंत्री बनाया गया। 2021 के चुनाव में जब भाजपा को फिर से बहुमत मिला तो पार्टी ने हिमंता को मुख्यमंत्री बना दिया। हिमंता अब भी राज्य के मुख्यमंत्री हैं और 2026 के असम लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को जीत मिली है। पार्टी ने एक बार फिर हिमंता को ही मुख्यमंत्री बनाना तय कर लिया है। हिमंता लगातार दूसरी बार 12 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
एन. बीरेन सिंह
मणिपुर के मुख्यमंत्री रह चुके एन. बीरेन सिंह भी साल 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी में आने के बाद भाजपा ने उन्हें पहले 2017 और फिर 2022 में मणिपुर का मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि, मणिपुर हिंका के चलते उन्हें पिछले साल (2025 में) मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
युमनाम खेमचंद सिंह
मणिपुर हिंसा के कारण एन.बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद छोड़ने बाद फरवरी 2025 में भाजपा ने युमनाम खेमचंद सिंह को सीएम पद की जिम्मेदारी दी। बता दें कि खेमचंद ने साल 2002 में बीरेन सिंह के साथ ही डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। साल 2013 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
मणिक साहा
भाजपा नेता डॉ. मणिक साहा अभी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं। लेकिन मणिक साहा ने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का कमल थामा था। भाजपा ने उन्हें राज्य में पार्टी का अध्यक्ष भी बनाया और 2022 में उन्हें मुख्यमंत्री पद की कमान भी सौंप दी।
पेमा खांडू
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी हमेशा से भाजपा में नहीं थे। साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था। इसके बाद वह पीपीए और फिर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होते ही पार्टी ने 2016 में उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया। इसके बाद 2019 और 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भी पेमा खांडू को ही मुख्यमंत्री बनाया गया।
