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किरन रिजिजू ने ओवैसी की तारीफ में पढ़े कसीदे, बोले- पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी

किरन रिजिजू ने मंगलवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर पाकिस्तान के झूठे प्रचार को बेनकाब करने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सांसद असदुद्दीन ओवैसी की प्रशंसा की।

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केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने ओवैसी की वीडियो शेयर कर की प्रशांसा।

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने मंगलवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर पाकिस्तान के झूठे प्रचार को बेनकाब करने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सांसद असदुद्दीन ओवैसी की प्रशंसा की। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "पाकिस्तान की तो पोल ही खोल दी।"

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने ओवैसी की प्रशंसा तब की जब एआईएमआईएम प्रमुख ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख द्वारा जारी की गई तस्वीर को भारत पर 'अपनी जीत का प्रतीक' बताया था। दरअसल, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ऑपरेशन बनयान अल-मर्सस का स्मृति चिन्ह भेंट किया था और भारत पर अपनी जीत का दावा किया था। हालांकि बाद में पता चला कि यह तस्वीर 2019 के चीन सैन्य अभ्यास की थी।

ओवैसी ने पाकिस्तान की खोली पोल

इसको लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि चीजों को सही तरीके से कॉपी करने के लिए दिमाग की जरूरत होती है। ओवैसी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर को 'बेवकूफ जोकर' भी बताया। ओवैसी ने जिस स्मृति चिन्ह का जिक्र किया, वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में भेंट किया गया था, जिसमें पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी शामिल हुए थे।

ये बेवकूफ जोकर भारत से प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं

ओवैसी ने सभा में कहा कि कल पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने राष्ट्रपति और नेशनल असेंबली स्पीकर की मौजूदगी में पाक प्रधानमंत्री को यह फोटो दी। ये बेवकूफ जोकर भारत से प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं। उन्होंने 2019 के चीनी सेना के अभ्यास की एक तस्वीर दी थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह भारत पर जीत है। पाकिस्तान यही करता है, वे एक तस्वीर भी ठीक से नहीं दे सकते।"

नकल करने के लिए अकल चाहिए, नालायकों के पास तो अकल भी नहीं है

22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर भारत के कूटनीतिक संपर्क के तहत कुवैत में एआईएमआईएम सांसद ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व पर उनकी नकल करने की हरकतों के लिए और भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और उनके सेना प्रमुख को नकल करने के लिए दिमाग की जरूरत नहीं है। हम बचपन में सुनते थे कि 'नकल करने के लिए अकल चाहिए, नालायकों के पास तो अकल भी नहीं है।

बार बार शर्मसार हुआ पाकिस्तान

यह पहला मामला नहीं है जब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ संघर्ष में खुद को बीस साबित करने के लिए दुष्प्रचार का सहारा लिया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार से जुड़ी एक और घटना ने उन्हें शर्मसार कर दिया, जब उन्होंने पाकिस्तानी वायुसेना की प्रशंसा करने के लिए ब्रिटेन के एक दैनिक अखबार में प्रकाशित एक लेख की नकली तस्वीर का इस्तेमाल किया। जब उनकी यह शेखी उनके अपने मीडिया द्वारा पकड़ी गई, तो पाकिस्तानी प्रतिष्ठान दुनिया के सामने हंसी का पात्र बन गया। पाकिस्तान की इस तरह की कई फेक न्यूज पकड़ी गई। (IANS इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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