Arvind Kejriwal News: आबकारी नीति घोटाले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी के संयोजक पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत में भाजपा नेता ने कहा कि मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और अरविंद केजरीवाल तीनों की राजनीति का अंत तिहाड़ जेल के अंदर ही होना था। दिल्ली में जो नशे का जाल फैलाया गया, उसका न्याय होने का समय आ गया है। मिश्रा ने कहा कि आप 'चोर मचाए शोर' जैसा बर्ताव कर रही है।
केजरीवाल पर कपिल मिश्रा का हमला।
AAP सरकार ने दिल्ली में नेश का जाल फैलाया
भाजपा नेता ने कहा, 'केजरीवाल की गिरफ्तारी सुनिश्चित थी। उनका जो रवैया था और जिस तरह से हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार किया, उससे साफ जाहिर है कि इस भ्रष्टाचार के तार केजरीवाल के घर तक जाते हैं। दिल्ली की जनता का संघर्ष अब न्याय की तरफ जा रहा है। मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और अरविंद केजरीवाल तीनों की राजनीति का अंत तिहाड़ जेल के अंदर ही होना था। दिल्ली में जो नशे का जाल फैलाया गया, उसका न्याय होने का समय आ गया है।'
AAP 'चोर मचाए शोर' जैसा बर्ताव कर रही-कपिल मिश्रा
पंजाब के सीएम भगवंत मान के इस बयान पर कि केजरीवाल को तो गिरफ्तार कर लोगे लेकिन उनकी सोच को नहीं। इस पर भाजपा नेता ने कहा कि केजरीवाल की सोच वाले ज्यादातर लोग तिहाड़ जेल या देश की अलग-अलग जेलों में हैं। इस तरह की आपराधिक सोच की जगह जेल में होती है। आम आदमी पार्टी 'चोर मचाए शोर' जैसा बर्ताव कर रही है। उनके नेताओं को कोर्ट से जमानत नहीं मिली है। केजरीवाल का उड़ा हुआ चेहरा बता रहा है कि वे जान चुके हैं कि वे चोरी में पकड़े जा चुके हैं।'
'भ्रष्टाचार की बैलगाड़ी पर सभी सवार हैं'
राहुल की ओर से एकजुटता दिखाए जाने पर मिश्रा ने कहा कि भ्रष्टाचार की बैलगाड़ी पर सभी सवार हैं और एक दूसरे को ईमानदार बता रहे हैं। राहुल भी बेल पर बाहर हैं। जनता इनका सच जान चुकी है। अब न्याय के तराजू पर इनका न्याय होगा।
AAP के सामने संकट
केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद AAP और दिल्ली सरकार के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है और ऐसे में उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, कैबिनेट मंत्रियों आतिशी और सौरभ भारद्वाज को इस भूमिका के लिए उनके संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। ‘आप’ के सामने अब एक ऐसे नेता को चुनने की चुनौती है जो केजरीवाल की अनुपस्थिति में पार्टी और दिल्ली में उनकी सरकार की कमान संभाल सके। ‘आप’ नेतृत्व के लिए ऐसे नेता को चुनना वास्तव में एक कड़ी चुनौती है जिसका कद पार्टी संयोजक केजरीवाल के कद के समान या इसके आस-पास हो।
