'कोई भी व्हिप से नहीं बंधा, इच्छानुसार करें वोट', जब स्पीकर को हटाने पर चर्चा के दौरान नेहरू ने दिया था संदेश

No-Trust Motion Against Lok Sabha Speaker Om Birla: पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस सांसदों को कहा था कि कोई भी किसी व्हिप या निर्देश से बंधा नहीं है। वे अपनी इच्छानुसार मतदान करें।

No-Trust Motion Against Lok Sabha Speaker Om Birla: भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में विपक्ष द्वारा तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीवी मावलंकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसदों को संदेश दिया था कि वे किसी भी 'व्हिप' या निर्देश से बंधे नहीं हैं। उन्होंने सभी सांसदों से 'दलीय संबद्धता की परवाह किए बिना' इस मामले पर विचार करने का आग्रह किया था। नेहरू ने लोकसभा सदस्यों से अपील की थी कि वे इस मुद्दे को पार्टी के नजरिए से नहीं, बल्कि सदन की गरिमा से संबंधित मामले के रूप में देखें।

Jawaharlal Nehru

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (फाइल फोटो: @INCIndia)

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रस्ताव लाने के संबंध में दिए गए नोटिस ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, अतीत में भी ऐसे तीन अवसर आए, जब लोकसभा अध्यक्ष अथवा राज्यसभा के सभापति के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास व्यक्त किया और उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इस तरह की स्थिति पहली बार 18 दिसंबर, 1954 को पैदा हुई, जब विपक्ष ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मावलंकर को हटाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को 50 से अधिक सदस्यों के समर्थन में खड़े होने के बाद इसे स्वीकार कर लिया गया और इस पर चर्चा हुई।

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