10 अगस्त 2025 — भारतीय नौसेना 26 अगस्त को विशाखापत्तनम में दो अत्याधुनिक प्रोजेक्ट‑17ए (नीलगिरि श्रेणी) फ्रिगेट — ‘उदयगिरि’ (F35) और ‘हिमगिरि’ (F34) — को एक साथ नौसेना में शामिल करने की तैयारी कर रही है। यह दो प्रतिष्ठित भारतीय शिपयार्ड से निर्मित दो पहले सतह मुकाबला जहाजों को एक साथ शामिल करने का पहला अवसर होगा।
उदयगिरि और हिमगिरि जंगी जहाज नौसेना में होंगे शामिल (फोटो- AIR)
प्रोजेक्ट-17ए के तहत बन रहे जहाज
‘उदयगिरि’ और ‘हिमगिरि’ प्रोजेक्ट-17ए के तहत भारतीय नौसेना के लिए निर्मित किए जा रहे उन्नत जंगी जहाजों की एक शृंखला का हिस्सा हैं।प्रोजेक्ट-17ए (नीलगिरि श्रेणी) के तहत निर्मित पहले जहाज ‘नीलगिरि’ को जनवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में आयोजित कार्यक्रम में नौसेना के सुपुर्द किया था। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित दूसरा युद्धपोत उदयगिरि एक जुलाई को नौसेना को सौंप दिया गया था। प्रोजेक्ट 17ए के तहत विकिसत युद्धपोत मौजूदा समय में सेवारत शिवालिक श्रेणी (प्रोजेक्ट 17) के जंगी जहाजों की जगह लेंगे। इसके तहत बनाए जाने वाले सात जंगी जहाजों में से चार की आपूर्ति मुंबई एमडीएल करेगी, जबकि बाकी तीन कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) उपलब्ध कराएगी। ‘हिमगिरि’ जीआरएसई द्वारा निर्मित प्रोजेक्ट-17ए का पहला जंगी जहाज है।
नौसेना ने क्या कहा
नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय नौसेना 26 अगस्त को अग्रिम पंक्ति के दो युद्धपोतों-‘उदयगिरि’ (एफ35) और ‘हिमगिरि’ (एफ34) को एक साथ नौसेना में शामिल करने की तैयारी कर रही है। प्रवक्ता के मुताबिक, “यह पहली बार होगा कि दो प्रतिष्ठित भारतीय शिपयार्ड के दो प्रमुख लड़ाकू जहाजों का एक ही समय में विशाखापत्तनम में जलावरण किया जाएगा।”
आत्मनिर्भर भारत पहल की सफलता
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ये बहु-मिशन जंगी जहाज भारत के समुद्री हितों के क्षेत्र में “पारंपरिक और गैर-पारंपरिक, दोनों तरह के खतरों से निपटने में योगदान देने में सक्षम हैं।” अधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि भारत में नौसेना के तेजी से बढ़ते आधुनिकीकरण और विभिन्न शिपयार्ड से अत्याधुनिक युद्धपोतों की आपूर्ति करने की उसकी क्षमता को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की सफलता को दर्शाती है।
रडार की पकड़ में आने की संभावना बेहद कम
अधिकारियों के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि ‘उदयगिरि’ नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो की ओर से डिजाइन किया गया 100वां जहाज है। उन्होंने कहा कि ‘उदयगिरि’ और ‘हिमगिरि’ पहले के डिजाइन की तुलना में एक “पीढ़ीगत छलांग” का प्रतिनिधित्व करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 6,700 टन भार ढोने में सक्षम प्रोजेक्ट-17ए के जंगी जहाज अपने पूर्ववर्ती शिवालिक-श्रेणी के युद्धपोतों से लगभग पांच फीसदी बड़े हैं, फिर भी इनका आकार अधिक पतला है और इनके रडार की पकड़ में आने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने बताया कि ये जहाज डीजल इंजन और गैस टर्बाइन का इस्तेमाल करने वाले संयुक्त डीजल और गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन संयंत्रों से संचालित होते हैं, जो नियंत्रणयोग्य-पिच प्रणोदक में जान फूंकते हैं और एक एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) से प्रबंधित होते हैं।
क्या है खासियत
नौसेना प्रवक्ता ने कहा, “हथियारों के बेड़े में सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइलें, 76 मिमी एमआर गन और 30 मिमी तथा 12.7 मिमी की क्लोज-इन हथियार प्रणालियां व पनडुब्बी रोधी या पानी के अंदर मार करने वाली हथियार प्रणालियां शामिल हैं।”
