भारत ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आज एक नया इतिहास रचा है। रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को और मजबूत करते हुए पूरी तरह से देश में ही डिजाइन और निर्मित पहले एयर कुशन व्हीकल (ACV) यानी 'होवरक्राफ्ट' H-561 को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। यह देश के समुद्री उद्योग की बढ़ती ताकत और तकनीकी आत्मनिर्भरता का एक बेजोड़ उदाहरण है।
भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल हुआ पहला स्वदेशी होवरक्राफ्ट (चित्र साभार: Faccebook/Indian Coast Guard)
गोवा के रासईम शिपयार्ड में गूंजा 'जय हिंद'
इस ऐतिहासिक और अत्याधुनिक होवरक्राफ्ट का इंडक्शन समारोह गोवा में स्थित चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रासईम (Rassaim) सुविधा केंद्र पर आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में भारतीय तटरक्षक बल (भारतीय तटरक्षक) के शीर्ष सैन्य अधिकारी और रक्षा निर्माण उद्योग जगत के कई दिग्गज प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों के मुताबिक, तटरक्षक बल के बेड़े में इस अत्याधुनिक जहाज का शामिल होना देश की समुद्री सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
क्या होता है होवरक्राफ्ट और क्यों है यह खास?
होवरक्राफ्ट या एयर कुशन व्हीकल एक विशेष प्रकार का जल-थल चर यानी जमीन और पानी पर चलने वाला वाहन होता है, जो पारंपरिक जहाजों की तरह पानी में डूबकर नहीं चलता। यह वाहन अपनी सतह के नीचे हवा का एक भारी दबाव (एयर कुशन) बनाता है, जिसके सहारे यह जमीन, पानी, कीचड़, बर्फ या गहरे दलदली इलाकों के ऊपर थोड़ा हवा में तैरते हुए बेहद तेज गति से भाग सकता है। भारत के कई तटीय इलाके, जैसे गुजरात का सर क्रीक या सुंदरवन का डेल्टा, बेहद उथले और दलदली हैं। ऐसे दुर्गम रास्तों पर पारंपरिक नौसैनिक नावें काम नहीं कर पातीं। ऐसे में स्वदेशी होवरक्राफ्ट H-561 तटरक्षक बल को उन जगहों पर भी तेजी से पहुंचाएगा जहां पहुंचना पहले नामुमकिन था।
छह होवरक्राफ्ट की सीरीज का पहला योद्धा
भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए चौगुले एंड कंपनी के साथ कुल छह स्वदेशी होवरक्राफ्ट के निर्माण का अनुबंध किया गया था। H-561 इस शृंखला का पहला गौरवशाली उत्पाद है। इस प्रोजेक्ट के तहत बाकी के 5 होवरक्राफ्ट भी जल्द ही तटरक्षक बल को सौंपे जाएंगे।
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने इस मौके पर बयान जारी कर कहा कि "इस होवरक्राफ्ट का निर्माण रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है। इसके आने से समुद्री गश्ती, खोज और बचाव अभियानों (Search and Rescue), अवैध घुसपैठ को रोकने और खुफिया निगरानी कार्यों में अभूतपूर्व गति आएगी। हम भविष्य की नई सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अब अधिक सक्षम हैं।"
