रांची: झारखंड के सीनियर IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को शराब घोटाले में शामिल होने के इल्जाम में ACB यानी एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबी पूछताछ के बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया। गौर हो कि इससे पहले के घटनाक्रम में झारखंड में शराब घोटाले में पीई (प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी) दर्ज करने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने आईएएस और तत्कालीन एक्साइज सेक्रेटरी विनय कुमार चौबे से पूछताछ शुरू की थी।
एसीबी ने आबकारी विभाग के सचिव के रूप में चौबे के कार्यकाल के दौरान आबकारी नीति में अनियमितताओं के आरोपों की जांच शुरू की थी। राज्य सरकार ने इससे पहले 1999 बैच के आईएएस अधिकारी चौबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी थी।अधिकारी के मुताबिक एसीबी की एक टीम सुबह चौबे के आवास पर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए ब्यूरो के मुख्यालय ले गई। उन्होंने बताया कि आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह से भी एसीबी ने पूछताछ की।
सीनियर IAS अधिकारी विनय चौबे के साथ संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह को भी अरेस्ट किया गया है। गजेंद्र सिंह पर भी शराब घोटाला में शामिल होने का आरोप है। यह मामला साल 2022 में झारखंड में बनी नई शराब नीति से जुड़ा है। आरोप है कि इस नीति में कुछ बदलाव ऐसे किए गए, जिससे छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के लोगों को फायदा मिला। छत्तीसगढ़ के अधिकारी और व्यापारी मिलकर झारखंड में शराब की सप्लाई, काम करने वाले लोगों की व्यवस्था और होलोग्राम सिस्टम के ठेके हासिल किए। इससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ ।
27 सितंबर 2024 को दर्ज हुई शिकायत
इस मामले में छत्तीसगढ़ की ACB ने 27 सितंबर 2024 को एफआईआर दर्ज की, जिसमें विनय चौबे सहित सात लोगों के नाम थे। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कई जगह छापा मारा और दस्तावेज जब्त किए। अब छत्तीसगढ़ की एसीबी ने झारखंड सरकार से विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी मांगी है।
आर्थिक अपराध शाखा ने पहले शुरु की जांच
दरअसल, इस मामले की जड़ें छत्तीसगढ़ से जुड़ी हैं, जहां शराब घोटाले में स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के अफसरों और कई बड़े कारोबारियों की भूमिका सामने आई है। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जांच वहां की आर्थिक अपराध शाखा ने शुरू की थी। इसके बाद ईडी ने भी इस मामले में जांच शुरू की।
ईडी को इस दौरान यह भी जानकारी मिली कि जिस सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला किया, उसी ने झारखंड में भी नई उत्पाद नीति लागू करवाई और यहां भी उसी तर्ज पर घोटाला दोहराया गया। इसी आधार पर ईडी की छत्तीसगढ़ इकाई ने झारखंड के तत्कालीन एक्साइज सेक्रेटरी विनय चौबे को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था। ईडी ने इसमें ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और अक्टूबर 2024 में आईएएस विनय चौबे सहित कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। (एजेंसी इनपुट के साथ)
