देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के जारी विरोध प्रदर्शन पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि देश की राजनीति अब अपनी "जायज सीमाओं" से बाहर जा रही है। राजनीतिक दलों का अपने विरोधियों की आलोचना करना समझ आता है, लेकिन चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हमलों का शिकार बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
CEC के खिलाफ विपक्ष के हंगामे पर भड़के पूर्व SG हरीश साल्वे
साल्वे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष चुनाव आयोग पर लगातार हमलावर है। विपक्षी नेता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के जंतर-मंतर धरने के बीच दिल्ली में नए नियम लागू, 10 दिन पहले मंजूरी जरूरी; ये जगहें पूरी तरह बैन
चुनाव आयोग में कथित मतभेदों की खबरों को किया खारिज-साल्वे
मीडिया से बातचीत के दौरान हरीश साल्वे ने चुनाव आयोग में कथित मतभेदों की खबरों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में बिना किसी पुख्ता आधार के खबरें छापी गईं कि चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति थी। जबकि चुनाव आयोग ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और प्रेस नोट जारी करके साफ कर दिया है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। जब आयोग ने स्पष्टीकरण दे दिया, तो इस विवाद को वहीं खत्म हो जाना चाहिए था।
साल्वे ने आगे कहा कि अगर तीन सदस्यों वाले किसी पैनल में कोई सदस्य असहमत होता है, तो वह अपनी असहमति दर्ज कराता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में संशोधन से जुड़ा मुद्दा एक अलग कानूनी पहलू है, जिसे संस्था की कार्यप्रणाली के विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
'सभी संवैधानिक संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र और सर्वोच्च'
संविधान का हवाला देते हुए पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और चुनाव आयोग अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र और सर्वोच्च हैं। अगर किसी संस्था के काम पर कानूनी सवाल उठता है, तो उसका फैसला करने का अंतिम अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास है। यदि कोर्ट को कुछ गलत लगेगा, तो वह आदेशों को रद्द कर देगा। साल्वे ने अफसोस जताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह कीचड़ में घसीटना भारतीय राजनीति का एक बेहद दुखद मोड़ है।
