जम्मू-कश्मीर में जिस जोश के साथ गुलाम नबी आजाद ने अपनी पार्टी शुरू की थी, वो जोश अब ठंडा पड़ता दिख रहा है, कारण है उनकी नई पार्टी में विद्रोह। आजाद ने कांग्रेस छोड़ने के बाद डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी (DAP) का गठन किया था, जिसमें कांग्रेस के कई स्थानीय लेवल के बड़े नेता शामिल हो गए थे, लेकिन अब आजाद की पार्टी दरकने लगी है।
गुलाम नबी आजाद का जिसने किया था समर्थन, अब वही कर रहे थे विरोध
हो रहा पछतावा
गुलाम नबी आजाद के समर्थन में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद ने कहा कि कांग्रेस छोड़ना एक बड़ी भूल थी। तारा चंद ने कहा कि वे अपनी आखिरी सांस तक धर्मनिरपेक्ष रहेंगे और राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो यात्रा के जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर इसमें शामिल भी होंगे।
लगाए आरोप
इससे पहले तारा चंद ने कहा था कि वह कांग्रेस में लौट रहे हैं क्योंकि गुलाम नबी आज़ाद के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी केवल धर्मनिरपेक्ष वोटों को विभाजित कर रही है। उन्होंने कहा- "ज्यादातर लोग पार्टी छोड़ देंगे। पार्टी कहां है? यह लगभग न के बराबर है और केवल कुछ ही लोग इसमें रहेंगे।"
आजाद ने पार्टी से निकाला
डीएपी के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए तारा चंद, डॉ मनोहर लाल और बलवान सिंह को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। वहीं पूर्व विधायक सुरनकोट चौधरी मोहम्मद अकरम आजाद के नेतृत्व वाली डीएपी से पहले ही दूरी बना चुके हैं। कहा जा रहा है कि ये सभी फिर से कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
