Fake Encounter: पंजाब के पांच पूर्व पुलिसकर्मियों को 1993 के फर्जी मुठभेड़ मामले में आजीवन कारावास की सजा

इस मामले में पांच अन्य आरोपी पुलिस अधिकारी - तत्कालीन निरीक्षक गुरदेव सिंह, तत्कालीन उप निरीक्षक ज्ञान चंद, तत्कालीन एएसआई जगीर सिंह और तत्कालीन हेड कांस्टेबल मोहिंदर सिंह और अरूर सिंह की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।

मोहाली की एक सीबीआई अदालत ने तरनतारन जिले में 1993 में फर्जी मुठभेड़ में सात लोगों की मौत मामले में पुलिस के पांच पूर्व अधिकारियों को सोमवार को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। CBI के विशेष न्यायाधीश बलजिंदर सिंह सरा की अदालत ने फैसला सुनाते हुए प्रत्येक दोषी पर 3.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।अदालत ने एक अगस्त को उन्हें भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक षड्यंत्र, हत्या और सबूत नष्ट करने का दोषी पाया था।

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सीबीआई अदालत ने सुनाई सजा (प्रतीकात्मक फोटो: istock)

तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (dsp) भूपिंदरजीत सिंह , तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक (ASI) देविंदर सिंह , तत्कालीन एएसआई गुलबर्ग सिंह , तत्कालीन निरीक्षक सूबा सिंह और तत्कालीन एएसआई रघबीर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।भूपिंदरजीत सिंह बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद से सेवानिवृत्त हुए जबकि उपनिरीक्षक देविंदर सिंह डीएसपी के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे।

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