स्पैम कॉल्स और डिजिटल ठगी से परेशान लोगों के लिए अब राहत की खबर है। ट्राई यानी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने ऐसे मामलों पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली में हुई जेसीओआर (नियामकों की संयुक्त समिति) की 9वीं बैठक में ट्राई ने कई अहम फैसले लिए, जो सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। इस बैठक में आरबीआई, सेबी, पीएफआरडीए, आईटी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और एनपीसीआई जैसे बड़े संस्थानों के अधिकारी शामिल हुए। सबका मकसद एक ही था कि कैसे रोकें बढ़ते डिजिटल स्कैम और फर्जी कॉल्स।
बैठक में ट्राई और आरबीआई ने मिलकर चल रहे ‘डिजिटल कंसेंट प्रोजेक्ट’ की प्रगति की समीक्षा की। इस प्रोजेक्ट के तहत अब किसी बैंक या कंपनी को यूजर की मंजूरी के बिना प्रमोशनल कॉल या मैसेज भेजने की इजाजत नहीं होगी। यानी बिना आपकी मर्जी के कोई बैंक या फिनटेक कंपनी आपको तंग नहीं कर पाएगी।
साथ ही, अब बैंकिंग और बीमा सेक्टर में 1600 सीरीज़ के कॉल नंबर इस्तेमाल करने की बात तय की गई है, ताकि लोगों को समझ आ सके कि कॉल असली है या फ्रॉड। इसके अलावा, फर्जी लिंक और ओटीटी लिंक भेजने वालों पर रोक लगाने के लिए सभी यूआरएल और कॉलबैक नंबरों को श्वेतसूची (Whitelist) में डालने का निर्देश दिया गया है।
ट्राई जल्द ही धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों की ब्लैकलिस्ट भी जारी करेगा, जिससे जनता को पहले से चेतावनी मिल सके। साथ ही ओटीपी और ऑनलाइन वेरिफिकेशन में कैप्चा और नई सिक्योरिटी चेक अनिवार्य किए जाएंगे। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि “डिजिटल दुनिया में लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। हम चाहते हैं कि हर यूजर ऑनलाइन स्पेस में खुद को सुरक्षित महसूस करे।”
कुल मिलाकर, ट्राई का यह कदम उन करोड़ों मोबाइल यूज़र्स के लिए राहत लेकर आया है जो रोज फेक कॉल और फ्रॉड मैसेज से परेशान रहते हैं। अब डिजिटल ठगी करने वालों की खैर नहीं!
