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ED ने तमिलनाडु टीएएसएमएसी मामले में फिर से मारे छापे, PMLA अधिनियम के तहत की जा रही कार्रवाई

ED: प्रवर्तन निदेशालय ने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) से जुड़े धनशोधन मामले में राज्य में शुक्रवार को फिर छापे मारे। जानकारी के अनुसार, 10 स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

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तमिलनाडु टीएएसएमएसी मामले में फिर से छापेमारी

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) से जुड़े धनशोधन मामले में राज्य में शुक्रवार को फिर छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत टीएएसएमएसी अधिकारियों और एजेंट से जुड़े लगभग 10 स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। राज्य सरकार के एक निकाय के रूप में काम करने वाले टीएएसएमएसी का तमिलनाडु में शराब व्यापार पर एकाधिकार है। ईडी ने इस मामले में मार्च में पहली बार छापेमारी की थी। ईडी ने तब कहा था कि टीएएसएमएसी के संचालन में कथित अनियमितताएं पाई गई थीं, जिनमें निविदा प्रक्रियाओं में हेरफेरी और डिस्टिलरी कंपनी के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया जिसका कोई लेखा जोखा नहीं है।

आवेदक KYC और डिमांड ड्राफ्ट के बीच पाई गई थी विसंगतियां

6 मार्च, 2025 को ईडी ने छापेमारी में स्थानांतरण पोस्टिंग, परिवहन निविदा हेरफेर, बार लाइसेंस निविदाएं, कुछ डिस्टिलरी के पक्ष में इंडेंट ऑर्डर और अधिकारियों से जुड़े टीएएसएमएसी आउटलेट्स पर प्रति बोतल 10-30 रुपये के अतिरिक्त शुल्क से संबंधित आपत्तिजनक डेटा बरामद किया था। जांच में टीएएसएमएसी की परिवहन निविदा प्रक्रिया में हेराफेरी का पता चला, जिसमें आवेदक केवाईसी विवरण और डिमांड ड्राफ्ट के बीच विसंगतियां शामिल थीं, तथा निविदाएं तब भी प्रदान कर दी गईं, जब केवल एक ही आवेदक था।

TASMAC कथित तौर पर ट्रांसपोर्टरों को सालाना 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा का भुगतान करता है। साक्ष्यों से यह भी पता चला कि बार लाइसेंस टेंडर कथित तौर पर बिना GST/PAN नंबर या उचित KYC दस्तावेज़ों के आवेदकों को आवंटित किए गए थे। जांच में पता चला कि डिस्टिलरी कंपनियों और वरिष्ठ TASMAC अधिकारियों के बीच सीधा संवाद था जिसका उद्देश्य बढ़े हुए इंडेंट ऑर्डर और अनुचित लाभ प्राप्त करना था। वित्तीय धोखाधड़ी में डिस्टिलरी और बॉटलिंग फर्म शामिल हैं। उन्होंने कथित तौर पर खर्च बढ़ा-चढ़ाकर बताया और 1000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की बेहिसाब नकदी हड़पने के लिए फर्जी खरीदारी की। इस पैसे का इस्तेमाल आपूर्ति के बढ़े हुए ऑर्डर के लिए रिश्वत देने में किया गया। बॉटलिंग कंपनियों ने कथित तौर पर अतिरिक्त भुगतान को आसान बनाने के लिए बिक्री के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए, जिन्हें बाद में कमीशन काटकर नकद में वापस ले लिया गया। इस मिलीभगत में वित्तीय अभिलेखों में हेराफेरी, नकदी प्रवाह को छिपाना और व्यवस्थित तरीके से कर चोरी शामिल है। ईडी इन अवैध गतिविधियों में शामिल TASMAC , डिस्टिलरी और बॉटलिंग कंपनियों के कर्मचारियों और सहयोगियों की भूमिका की जांच जारी रखे हुए है।

Shashank Shekhar Mishra
Shashank Shekhar Mishraauthor

शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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