आज ही के दिन देश के करोड़ों लोगों को मिली महाभारत के संजय की तरह 'दूरदर्शन' की शक्ति

Doordarshan History: 15 सितंबर 1959 को शुरू हुआ दूरदर्शन भारत में टेलीविजन क्रांति की नींव बना। साल 1965 में नियमित सेवा और 1982 में रंगीन राष्ट्रीय प्रसारण ने इसके विस्तार को रफ्तार दी।

Doordarshan History: बात साल 1959 की है। अभी देश को आजाद हुए करीब 12 साल हुए थे। देश के लोगों और नेतृत्व की आंखों में भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने थे। लेकिन महाभारत के संजय की तरह दिव्य दृष्टि नहीं थी, जो सैकड़ों किमी दूर से सब-कुछ साफ-साफ देख सके। अब सरकार लोगों को संजय की ही तरह दूर-दर्शन की शक्ति देने का मन बना चुकी थी। जिस तरह संजय ने हस्तिनापुर में बैठे-बैठे ही सैकड़ों किमी दूर कुरुक्षेत्र में चल रहे युद्ध का आंखों देखा हाल धृतराष्ट्र को सुनाया था, सरकार वैसे ही देश के लोगों को देश-दुनिया का हाल सुनाना चाहती थी। अपनी योजनाएं उन तक पहुंचाना चाहती थी। इसके लिए सरकार ने 'दूरदर्शन' को माध्यम बनाया। आधुनिक टेलीविजन के आने से देश के लोगों को सरकार ने कुछ-कुछ संजय जैसा ही अनुभव दिया। इससे पहले किसने सोचा था कि घर में रखा एक डिब्बा दूर-दराज की घटनाओं, खेल, समाचार, मनोरंजन और देश-दुनिया की तस्वीरें लोगों के सामने ले आएगा। इसी बदलाव की शुरुआत 1959 में आज ही के दिन यानी 15 सितंबर को दूरदर्शन के प्रयोग के साथ हुई थी।

Doordarshan History

15 सितंबर 1959 को शुरू हुआ था दूरदर्शन का इतिहास

1959 में एक छोटे प्रयोग से हुई शुरुआत

15 सितंबर 1959 को दिल्ली में सार्वजनिक सेवा के तौर पर टेलीविजन प्रसारण का प्रयोग शुरू किया गया था। उस शुरुआती दौर में संसाधन सीमित थे। एक अस्थायी स्टूडियो और छोटे ट्रांसमीटर से आवाज और तस्वीरें ही प्रसारित की जाती थीं। उस समय शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह छोटा एक्सपेरिमेंट आगे चलकर भारत के सबसे बड़े प्रसारण नेटवर्क में बदल जाएगा। 1965 में दूरदर्शन नियमित सेवा के रूप में सामने आया और दिल्ली व आसपास के घरों तक टेलीविजन सिग्नल पहुंचने लगे। इसके बाद तो इसका विस्तार बहुत ही तेजी से हुआ। 1972 तक मुंबई और अमृतसर तक टीवी सेवा पहुंच गई और 1975 तक सात अन्य शहर भी टीवी नेटवर्क से जुड़ गए।

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