Dengue in Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में डेंगू के डंक से साल 2022 में लोगों की मौतें हुईं या नहीं?...इस सवाल पर अस्पतालों का कहना है हां, जबकि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आंकड़े कहते हैं नहीं, ऐसा नहीं हुआ है।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
अंग्रेजी अखबार दि इंडियन एक्सप्रेस ने कई सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के सीनियर अफसरों से इस बारे में बात की, जिन्होंने पुष्टि की कि Haemorrhagic Fever, डेंगू की वजह से हुए कॉम्पलिकेशंस (स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें) और Co-Morbid परिस्थितियों (गंभीर बीमारियों) की वजह से मौतें देखी गईं।
हैरत की बात है कि शहर के कई अस्पतालों में डेंगू के केस सामने आने के बाद भी एमसीडी की ओर से जारी किया जाने वाले आधिकारिक डेटा बताता है कि इस बीमारी की वजह से दिल्ली में अब तक (खबर लिखे जाने तक) एक भी जान नहीं गई।
दरअसल, एमसीडी हर हफ्ते डेंगू, मलेरिया और चिकनगूनिया के ताजा मामलों और इन बीमारियों से होने वाली मौतों से जुड़ी रिपोर्ट जारी करता है। लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, इस साल डेंगू के 3044 केस और शून्य मौतें रिपोर्ट किए गए। निगम अधिकारियों का दावा था कि डेटा अस्पतालों से साझा नहीं किया, इसलिए यह चीज आधिकारिक बुलेटिन का हिस्सा नहीं थी।
सरकार की ओर से चलाए जाने वाले बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक एम्स के सामने बने सफदरजंग अस्पताल ने अखबार को बताया कि पांच मरीज डेंगू के चलते सितंबर में मर गए थे, जबकि अक्टूबर में भी इतनी ही जान गई थीं। जुलाई और जनवरी 2022 में भी एक-एक जान गई थीं। अब तक अस्पताल में डेंगू के 813 मामले दर्ज किए गए।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ.सुरनजीत चटर्जी ने बताया कि मरीजों (डेंगू के) की संख्या अधिक थी, पर मौतें उतनी ज्यादा नहीं रहीं। इस बीच, एचसीएमसीटी मनिपाल हॉस्पिटल्स में इंटरनल मेडिसिन की एचओडी डॉ.चारू गोयल सचदेवा ने कहा- मरीज डेंगू बुखार के साथ टाइफाइड बुखार या फिर हेपेटाइटिस ए जैसे डुअल (दोहरे) इन्फेक्शंस की चपेट में भी आए थे।
