नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन 15 दिन से लगातार जारी है। इस विरोध प्रदर्शन के साथ ही जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पिछले आठ दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। इसका असर अब उनके स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि अनशन शुरू होने के बाद से उनका करीब 6 किलोग्राम वजन कम हो चुका है।
वांगचुक का ऐसा है हेल्थ अपडेट
डॉक्टरों की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक का ब्लड प्रेशर 112/70 mm Hg, हृदय गति 72 प्रति मिनट और ब्लड शुगर 67 mg/dL दर्ज किया गया। उनकी हाइड्रेशन स्थिति संतोषजनक है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं। हालांकि उनका वजन घटकर 60.95 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले सात दिनों में लगभग 6 किलोग्राम की कमी दर्शाता है।
CJP लगातार आरोप लगा रही है कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही अनियमितताओं और पेपर लीक ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित किया है। पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि रविवार को NEET अभ्यर्थी रिया कुमारी थापा के माता-पिता प्रदर्शन स्थल पहुंचे। पार्टी का दावा है कि कथित पेपर लीक से टूटे सपनों के कारण रिया की मौत हुई थी। दिपके के अनुसार, सेना के पूर्व जवान रहे रिया के पिता ने आंदोलन में शामिल होकर अपील की कि किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भी दिया सीजेपी को समर्थन
इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी आंदोलन के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। किसान संगठन अब 7 जुलाई को अपना प्रतिनिधिमंडल जंतर-मंतर भेजेगा। SKM ने कहा कि हर छात्र को पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी सरकार की है।
AISA के छात्रों का भी जारी है प्रदर्शन
वहीं, वामपंथी छात्र संगठन AISA के कई सदस्य भी अलग मंच पर आमरण अनशन जारी रखे हुए हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) की संयुक्त सचिव दानिश अली को शनिवार को ब्लड शुगर 46 mg/dL तक गिरने के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जबकि नेहा, मनीष, हृषिकेश, दीपक कुमार वर्मा और आमीन अब भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं।
गौरतलब है कि CJP का यह आंदोलन 20 जून को देश की परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के विरोध में शुरू हुआ था और तब से इसे कई राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
