केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां पर देश की राजनीति चरम पर है। वहीं पर सीजेपी ने अब छात्र आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की है। शनिवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच वार्ता का एक और दौर हुआ।
सरकार से बनी बात, खत्म हुआ छात्र आंदोलन
इस बातचीत में सरकार ने सीजेपी की प्रमुख मांगों को मान लिया। इसके बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरभ दास ने आंदोलन वापस लेने की औपचारिक घोषणा की और सभी छात्रों से शांतिपूर्ण ढंग से घर लौटने का आग्रह किया।
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कभी हिंसा का नहीं अपनाया रास्ता-अन्ना हजारे
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और आंदोलन के खत्म होने पर देश की प्रमुख हस्तियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। वरिष्ठ समाजसेवक अन्ना हजारे ने शांति का संदेश देते हुए कहा कि समस्याओं का हल कभी भी हिंसा से नहीं निकल सकता। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में 22 बार अनशन किया लेकिन कभी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया, जिसके कारण देश में 10 बड़े कानून बने।
दूसरी तरफ, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र जीवित है और युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि जनशक्ति के आगे किसी भी सरकार को झुकना पड़ता है। पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के फैसले और सरकार के रुख का स्वागत किया। उन्होंने इसे भारत के जीवंत लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि जिस शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से युवाओं ने अपनी बात रखी, वह काबिले-तारीफ है।
इसी बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को युवाओं के संघर्ष का सुखद परिणाम बताया। हालांकि, उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान केवल एक चेहरा थे जो ध्वस्त हो चुकी शिक्षा प्रणाली को दर्शाते थे। राहुल गांधी के अनुसार, असली चुनौती उस व्यवस्था में सुधार करना है जिसने हमारी शिक्षा प्रणाली को खोखला कर दिया है।
