थरूर ने भारत द्वारा ब्रिक्स समिट की मेजबानी करने के डिप्लोमैटिक महत्व का बचाव किया। उन्होंने 'ग्लोबल साउथ' के साथ संबंध मजबूत करने और भारत की सबको साथ लाने की क्षमता (कन्वेनिंग पावर) को दिखाने में इसकी भूमिका पर जोर दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर शुक्रवार को ब्रिक्स समिट की भारत की अध्यक्षता पर हो रही बहस में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली द्वारा समिट की मेजबानी करने से महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक फायदा मिलता है और भारत को 'ग्लोबल साउथ' के साथ अपना जुड़ाव मजबूत करने का मौका मिलता है।
शशि थरूर और पी. चिदंबरम (फाइल फोटो
उन्होंने कहा कि यह समिट भारत की डिप्लोमैटिक कन्वेनिंग पावर को भी दिखाता है और दुनिया भर के नेताओं को एक साथ लाकर ग्लोबल मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाता है।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया
कांग्रेस नेता की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब पार्टी के ही साथी और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या हालिया ब्रिक्स समिट से देश को कोई 'ठोस फायदा' मिला है।इस बीच, बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर हमला करने का मौका लपक लिया। उन्होंने कहा कि पार्टी सांसद थरूर ने खुद ही उस चीज़ का पर्दाफाश कर दिया जिसे वे कांग्रेस का प्रोपेगैंडा कहते हैं।
'फायदे या ठोस नतीजे... हमें उससे क्या फायदा मिल रहा है?
चिदंबरम ने सवाल किया था कि ब्रिक्स के साथ-साथ शंघाई सहयोग संगठन, G20 और QUAD जैसे अन्य मल्टीलेटरल ग्रुपिंग की सदस्यता से भारत को क्या हासिल हो रहा है।चिदंबरम ने कहा, 'फ़ायदे या ठोस नतीजे... हमें उससे क्या फ़ायदा मिल रहा है? मुझे तो नहीं दिखता। पिछले दो या तीन समिट में, मुझे कोई फ़ायदा नहीं दिखा।'
थरूर ने हाल के समय में कांग्रेस की लाइन से अलग रुख अपनाया है
समिट की मेज़बानी से भारत को क्या फायदे होने की उम्मीद है, इस सवाल के जवाब में थरूर ने कहा कि ब्रिक्स 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। थरूर ने हाल के समय में कांग्रेस की लाइन से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले, हम 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि 11 ब्रिक्स देश दुनिया की ज़्यादातर आबादी और ग्लोबल GDP के 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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''ग्लोबल साउथ' में 100 से ज़्यादा देश हैं, लेकिन यहाँ हमारे पास 'ग्लोबल साउथ' के 11 प्रमुख देश हैं जो सामूहिक रूप से विचारों की विविधता और उन देशों की श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनकी अध्यक्षता हम इस खास मौके पर कर रहे हैं। यह ग्रुपिंग, यानी सिर्फ 11 ब्रिक्स देश, दुनिया की ज़्यादातर आबादी और ग्लोबल GDP के 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।' उन्होंने कहा, 'यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, बल्कि ऐसी चीज़ है जिसे बाकी दुनिया को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।'
'यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है'
थरूर ने ब्रिक्स (BRICS) के सदस्य और ऑब्ज़र्वर देशों के नेताओं की मेजबानी करने के कूटनीतिक महत्व की ओर भी इशारा किया। कांग्रेस नेता ने कहा, 'एक दर्जन राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख - न केवल ब्रिक्स सदस्य, बल्कि कुछ ऑब्जर्वर देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेता भी आ रहे हैं। यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है।'उन्होंने आगे कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत की 'कूटनीतिक रूप से सबको एक साथ लाने की क्षमता' (diplomatic convening power) को दिखाता है, जिसका वैश्विक मंच पर अपना महत्व है।उन्होंने कहा, 'न केवल ब्रिक्स सदस्य, बल्कि कुछ ऑब्ज़र्वर देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेता भी आ रहे हैं। यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह एक खास तरह की कूटनीतिक क्षमता को दिखाता है, जिसका वैश्विक मंच पर अपना महत्व है।'
'हाल के वर्षों में ब्रिक्स से ठोस नतीजे सीमित रहे हैं'
हालांकि, थरूर चिदंबरम की इस बात से भी सहमत थे कि हाल के वर्षों में ब्रिक्स से ठोस नतीजे सीमित रहे हैं।उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उनकी बात सही है; अगर ठोस फायदों की बात करें, तो जब वे वित्त मंत्री थे, तब हुए 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' के गठन के बाद से ऐसा कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।'थरूर ने कहा कि न्यू डेवलपमेंट बैंक एक सकारात्मक नतीजा था और इससे विकास परियोजनाओं के लिए लोन के ज़रिए भारत को फायदा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक में भारत की आवाज़ का काफी असर है।
