मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के दो वकीलों ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के वकील बृजेश कुमार सिंह और शिव कुमार त्रिपाठी ने अलग-अलग पत्रों के जरिए अटॉर्नी जनरल का ध्यान चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स की ओर दिलाया है। दोनों पत्रों में आयोग की बहु-सदस्यीय व्यवस्था, फैसले लेने की प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के संदर्भ में सवाल उठाए गए हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक्शन की मांग (फाइल फोटो)
बृजेश कुमार सिंह ने क्या मांग की?
सुप्रीम कोर्ट के वकील बृजेश कुमार सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है।पत्र में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग को इस तरह संचालित किया, जैसे महत्वपूर्ण फैसले केवल एक व्यक्ति द्वारा लिए जा रहे हों।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें: भारत में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कौन करता है? CEC के चयन में कौन-कौन शामिल, 2023 Act से क्या बदला?
बृजेश कुमार सिंह के पत्र में कहा गया है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में सामने आई बातें सही हैं तो इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संस्थागत कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। साथ ही, यह सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और बहु-सदस्यीय व्यवस्था को लेकर तय किए गए सिद्धांतों के भी विपरीत हो सकता है।
शिव कुमार त्रिपाठी ने अटॉर्नी जनरल को लिखा पत्र
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील शिव कुमार त्रिपाठी ने भी 24 सितंबर को अटॉर्नी जनरल को प्रतिनिधित्व भेजकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संभावित आपराधिक अवमानना और संवैधानिक कदाचार की जांच की मांग की है।त्रिपाठी ने अपने पत्र में 23 सितंबर की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग की ओर से लिए गए कदमों और फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी।
मतदाता सूची और फॉर्म-6 से जुड़े फैसलों का जिक्र
मीडिया रिपोर्ट में जिन मुद्दों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया है, उनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाना, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस से जुड़े फैसले शामिल हैं।शिव कुमार त्रिपाठी ने अटॉर्नी जनरल से मीडिया रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित करने का अनुरोध किया है।
अनुच्छेद 324 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
त्रिपाठी के पत्र में कहा गया है कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत गठित बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है। इसलिए आयोग के फैसलों में उसकी सामूहिक और संस्थागत कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण है।पत्र में अटॉर्नी जनरल से यह भी जांचने का अनुरोध किया गया है कि कथित तौर पर एकतरफा तरीके से अधिकारों के इस्तेमाल की बात सही पाए जाने पर क्या यह अनुच्छेद 324 और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी सिद्धांतों के खिलाफ है।
अवमानना की कार्रवाई पर भी कानूनी राय मांगी
शिव कुमार त्रिपाठी ने अटॉर्नी जनरल से यह विचार करने को कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट होते हैं तो क्या यह सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी न्यायिक सिद्धांतों की जानबूझकर अवहेलना के दायरे में आता है और क्या ऐसी स्थिति में अवमानना की कार्यवाही कानूनी रूप से शुरू की जा सकती है।
