CDS Anil Chauhan : भारत-पाकिस्तान रिश्ते पर अपनी बात रखते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि 1947 में आजादी के समय सामाजिक, आर्थिक, जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय सहित कई मोर्चों पर पाकिस्तान हमसे आगे था लेकिन आज इन सभी मानकों पर भारत आगे है। देश में भारी विविधताएं होने के बावजूद भारत ने यह उपलब्धि हासिल की है लेकिन यह सफलता ऐसे नहीं मिली है। यह एक लंबी रणनीति का परिणाम है। भारत ने 2014 में भी पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर करने की कोशिश की। पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया गया लेकिन ताली दोनों हाथ से बजती है। यदि सब कुछ करने के बाद शत्रुता ही हासिल होगी तो दूर रहना ही एक अच्छी रणनीति मानी जाएगी।
सैन्य नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे सीडीएस
सिंगापुर में आयोजित शांगरी ला वार्ता को संबोधित करते हुए सीडीएस चौहान ने ये बातें कहीं। शांगरी ला वार्ता को सबसे बड़े रक्षा मंचों में से एक माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि जनरल चौहान ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, फिलीपीन, सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन वार्ताओं में सैन्य संबंधों को मजबूत करने, रक्षा सहयोग को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।
शांगरी ला वार्ता एक बड़ा रक्षा आयोजन है
दक्षिण एशियाई पर्यवेक्षकों के अनुसार, शांगरी ला वार्ता एक बड़ा रक्षा आयोजन है जहां रक्षा विशेषज्ञ भारत और पाकिस्तान संबंधी परिदृश्य को समझने की कोशिश करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी वार्ता को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में 40 मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधियों सहित 47 देशों के रक्षा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। चीन की ओर से ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी’ का प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहा है जिसमें रक्षा मामलों, विशेष रूप से ताइवान पर अमेरिका-चीन के रुख और दक्षिण चीन सागर में समुद्री अधिकार क्षेत्र पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
‘स्ट्रेट टाइम्स’ समाचार पत्र के अनुसार, 2019 के बाद यह पहली बार है जब चीन अपने रक्षा मंत्री को इस मंच में नहीं भेज रहा है।
