सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सरकारी विभागों के अस्थायी कर्मचारी भी पेंशन के हकदार, कोर्ट ने कहा- 'यह भीख या खैरात नहीं'

Supreme Court Judgment on Casual Laborers: यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की एक गरीब विधवा महिला के संघर्ष का नतीजा है, जिसके पति ने डाक विभाग में करीब तीन दशकों तक एक अस्थायी कर्मचारी के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।

Supreme Court Pension Verdict: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने अस्थायी श्रमिकों (Casual Labourers) के सामाजिक अधिकार को लेकर एक बड़ा नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए साफ तौर पर कहा कि किसी सरकारी विभाग में लंबे समय तक लगातार काम करने वाले अनियत श्रमिक भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों (Pensionary Benefits) के हकदार हैं। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस अरविंद कुमार मसीह (Justices Sanjay Karol and A G Masih) की पीठ ने सरकार की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि ऐसे कर्मचारियों को पेंशन देने से सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सरकारी विभागों के अस्थायी कर्मचारी भी पेंशन के हकदार, कोर्ट ने कहा- 'यह भीख या खैरात नहीं'

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सरकारी विभागों के अस्थायी कर्मचारी भी पेंशन के हकदार, कोर्ट ने कहा- 'यह भीख या खैरात नहीं'

एक विधवा महिला की 18 साल की कानूनी लड़ाई रंग लाई

यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की एक गरीब विधवा महिला के संघर्ष का नतीजा है, जिसके पति ने डाक विभाग (Department of Posts) में करीब तीन दशकों (30 साल) तक एक अस्थायी कर्मचारी (नाईट गार्ड) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। पति की मौत के बाद सरकार ने यह कहकर पेंशन देने से मना कर दिया था कि वे एक 'अस्थायी कर्मचारी' थे और उन्हें कभी औपचारिक रूप से नियमित (Regularise) नहीं किया गया था।

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