Calcutta High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य की 114 श्रेणियों को दिए गए ओबीसी आरक्षण पर उसका पुराना रोक संबंधी आदेश एक बार फिर प्रभावी हो गया है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय: 114 वर्गों के ओबीसी आरक्षण पर रोक बहाल (फोटो- calcutta high court)
यह स्थिति तब पैदा हुई जब पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार द्वारा इस रोक आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में दायर की गई 'विशेष अनुमति याचिका' (SLP) को वापस ले लिया। याचिका वापस लिए जाने के साथ ही हाईकोर्ट का पूर्व आदेश स्वतः पुनर्जीवित हो गया।
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NEET अभ्यर्थियों को बड़ा झटका
अदालत ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति के ओबीसी प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित करते हुए की। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि 114 श्रेणियों के तहत जारी किए गए विवादित ओबीसी प्रमाणपत्रों को अब मान्यता नहीं दी जाएगी। याचिकाकर्ता और ऐसे सभी अन्य उम्मीदवार, जिन्होंने केंद्रीय सूची के तहत खुद को ओबीसी बताते हुए 'राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा' (NEET) में भाग लिया था, उन्हें अब सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के रूप में ही माना जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी पहलू
पश्चिम बंगाल में 114 जातियों को दिए गए ओबीसी दर्जे पर काफी समय से कानूनी विवाद चल रहा था। इससे पूर्व, कलकत्ता हाईकोर्ट ने प्रक्रियागत अनियमितताओं और उचित सर्वेक्षण के अभाव का हवाला देते हुए इन श्रेणियों के आरक्षण पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाल ही में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस लेने के कदम ने हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम और प्रभावी बना दिया है। अदालत के इस ताजा रुख से राज्य के हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
