Vande Mataram Controvery: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) द्वारा अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो छंद गाने के 1937 के प्रस्ताव को लागू करने के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा विरोध जताया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और वोट बैंक के लिए देश के स्वाभिमान से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया।
'भारत माता के आह्वान का अपमान': नवीन का तीखा हमला
भाजपा नेता नितिन नवीन ने कांग्रेस के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, 'कांग्रेस ने अब अपने अपमान को एक प्रस्ताव की शक्ल दे दी है। उसकी कार्यसमिति ने तय किया है कि कांग्रेस के मंचों पर 'वंदे मातरम्' के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे।' 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस कार्यालय में पूरे वंदे मातरम को लेकर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा कि जिसे पहले 'संयोग' बताया जा रहा था, वह आज कांग्रेस की आधिकारिक नीति बन चुका है।
उन्होंने कहा, 'जब कुछ दिन पूर्व यही अपमान एक व्यक्ति के आचरण में उजागर हुआ था, तब कांग्रेस ने उसे संयोग बताकर टाल दिया था। आज वही अपमान कांग्रेस की नीति बन चुका है।' उन्होंने आगे कहा, ''भारत माता' की इस पावन वंदना का अपमान उन हजारों बलिदानियों का तिरस्कार है, जिन्होंने इसी गीत को अपनी चेतना में रखकर राष्ट्र के लिए बलिदान दिया था। यह केवल एक राजनीतिक बचाव नहीं, बल्कि उस वोट बैंक की भूख का प्रमाण है, जिसके आगे कांग्रेस ने हर बार राष्ट्र के स्वाभिमान को गिरवी रखा है। कांग्रेस आज की नई मुस्लिम लीग बन गई है।'
1937 का प्रस्ताव और कांग्रेस का रुख
कांग्रेस पार्टी ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी केवल 1937 में अपनी सर्वोच्च नीति-निर्धारक संस्था (CWC) द्वारा पारित प्रस्ताव का पालन कर रही है। कांग्रेस के अनुसार, 1937 के प्रस्ताव में यह तय किया गया था कि पार्टी के मंचों पर वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। हालांकि, भाजपा ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि राष्ट्र के स्वाभिमान की बलि देकर राजनीतिक बचाव करना कांग्रेस की पुरानी मानसिकता को दर्शाता है।
