Lok Sabha News: भाजपा और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक के मद्देनजर अपने सांसदों को व्हिप जारी कर आज यानी मंगलवार को सदन में उपस्थित रहने को कहा था। हालांकि कुछ भाजपा सांसद इस मौके पर नदारद रहे, ऐसे में पार्टी ने अपने सांसदों को नोटिस भेजने की तैयारी कर ली है। सरकार ने देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले विधेयक को विपक्षी दलों के भारी विरोध के बीच मंगलवार को निचले सदन में पेश किया और कहा कि इस पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जाएगा।
लोकसभा में एक राष्ट्र एक चुनाव विधेयक पेश।
करीब 20 सांसदों को नोटिस जारी कर सकती है भाजपा
सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है कि भाजपा द्वारा आज लोकसभा में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक पर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने वाले लगभग 20 सांसदों को नोटिस जारी किए जाने की संभावना है, जबकि सभी भाजपा सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया गया था।
‘एक देश, एक चुनाव' संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश
देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले विधेयक (One Nation, One Election) को सरकार ने मंगलवार को निचले सदन यानी लोकसभा में पेश किया। इस पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जाएगा। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और उससे जुड़े ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को निचले सदन में पुर:स्थापित करने के लिए रखा, जिनका विपक्षी दलों ने पुरजोर विरोध किया।
सदन में मत विभाजन के बाद ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ को पुर:स्थापित कर दिया गया। विधेयक को पेश किए जाने के पक्ष में 269 वोट, जबकि विरोध में 198 वोट पड़े। इसके बाद मेघवाल ने ध्वनिमत से मिली सदन की सहमति के बाद ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को भी पेश किया। दोनों विधेयकों को पुर:स्थापित किए जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपराह्न करीब एक बजकर 55 मिनट पर सदन की कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। यह पहली बार था कि नए सदन में किसी विधेयक पर इलेक्ट्रॉनिक मत विभाजन हुआ।
विधेयक पर विपक्षी दलों के विरोध के बीच, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब मंत्रिमंडल में चर्चा के लिए विधेयक आया था, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं मंशा जताई थी कि इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के विचार के लिए भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रमुख सहयोगी तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) और शिवसेना ने विधेयक का समर्थन किया। कानून मंत्री मेघवाल ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से संबंधित प्रस्तावित विधेयक राज्यों की शक्तियों को छीनने वाला नहीं है, बल्कि यह विधेयक पूरी तरह संविधान सम्मत है। उन्होंने विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की विपक्ष की मांग पर भी सहमति जताई।
