Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी काफी तेज हो चुकी है। उम्मीद है कि 6 अक्टूबर के बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा। राज्य में महागठबंधन की अगुआई कर रहे राजद की सीधी टक्कर एनडीए यानी बीजेपी से है।
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर JVC का ताजा सर्वे सामने आया है।(फोटो सोर्स: PTI)
इसी बीच जेवीसी के ताजा ओपिनियन पोल (JVC Poll) ने राज्य की दिलचस्प तस्वीर पेश की है। 1 से 25 सितंबर, 2025 के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में सभी 243 निर्वाचन क्षेत्रों में 73,283 लोगों से फोन पर बातचीत की गई। लोगों ने बताया कि उनका चुनावी मूड क्या है।
NDA की वापसी: जेवीसी सर्वे
पोल के अनुसार,बिहार में नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) को 130 से 150 के बीच सीटें मिलने की संभावना है। वहीं, बीजेपी अपने दम पर अकेले 66 से 77 सीटें हासिल कर सकती हैं। हालांकि, राज्य में मौजूदा सरकार को लेकर लोगों के मन में कुछ आक्रोश भी है। जनता के मन में स्थानीय विधायकों में भारी संतोष है। ताजा सर्वे के अनुसार, नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 52 से 58 सीटें मिलने के आसार हैं। वहीं, एनडीए के अन्य सहयोगी पार्टियों को 13 से 15 सीटें मिलती दिख रही है।
राजद नेता तेजस्वी यादव और सीएम नीतीश कुमार की फाइल फोटो।(फोटो सोर्स: PTI)
क्या है महागठबंधन का हाल?
बात करें महागठबंधन की तो तेजस्वी की अगुआई में महागठबंधन को 81 से 103 सीटें मिलते दिख रही है। वहीं, सर्वे में राष्ट्रीय जनता दल को 57 से 71 सीटें मिल सकती है। कांग्रेस को 11-14 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को 13 से 18 सीटें मिल सकती है।
PK का क्या होगा?
वहीं, लोगों को उम्मीद है कि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की वजह से चुनावी लड़ाई दिलचस्प बन गई है। सर्वे के मुताबिक, जन सुराज पार्टी को 4 से 6 सीटें मिल सकती है। वहीं, ओवैसी की AIMIM, BSP और अन्य 5-6 सीटें आ सकती है।
जन सुराज सुप्रीमो प्रशांत किशोर की फाइल फोटो।(फोटो सोर्स: PTI)
बिहार के मतदाता मुख्य रूप से कानून, पहचान और रोजगार को लेकर चिंताएं हैं। आइए, जानते हैं कि किन मुद्दों पर बिहार की जनता का फोकस।
- कानून और व्यवस्था – 25.9%
- जाति जनगणना – 25.5%
- बेरोजगारी – 21.2%
- वोट चोरी का दावा – 17%
- ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान को भारत की प्रतिक्रिया – 10.04%
महिला वोर्टर्स पर सबकी नजर
चाहे लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव, बिहार में महिला वोटर्स हमेशा एक्स फैक्टर रहती हैं। गौरतलब है कि 2020 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज़्यादा था (60% बनाम 54%)। चाहे एनडीए हो या महागठबंधन, दोनों बिहार की महिलाओं को लुभाने में जुटे हैं। हालांकि, सर्वे की माने तो राज्य में महिलाएं योजनाओं के बारे में कम जागरूक हैं। सिर्फ 29% महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के बारे में पता था, जबकि 57% ने इसके बारे में कभी सुना ही नहीं था।
भले ही जेवीसी पोल के आंकड़े एनडीए के पक्ष में है, लेकिन सर्वे में सत्ता-विरोध लहर भी साफ दिख रहा है। मतदाताओं में व्यक्तिगत विधायकों को लेकर गहरा असंतोष है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपने विधायकों के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं तो 62 प्रतिशत लोगों ने नहीं कहा। वहीं, महज 33 फीसदी लोग ही वर्तमान विधायक से खुश हैं।
कौन है CM फेस का लोकप्रिय चेहरा?
सर्वे के मुताबिक, बिहार में लीडरशिप की लड़ाई में मुख्य तीन चेहरे हैं। नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर। आइए जानते हैं कितने प्रतिशत लोगों को सीएम पद के लिए कौन सा चेहरा पसंद आ रहा है।
- नीतीश कुमार – 27%
- तेजस्वी यादव – 25%
- प्रशांत किशोर – 15%
- चिराग पासवान – 11%
- सम्राट चौधरी – 8%
- अन्य/अनाम – 14%
अनुमानित वोट शेयर
- एनडीए – 41–45%
- महागठबंधन- 37-40%
- जन सुराज पार्टी - 10-11%
- अन्य – 7–8%
अनुमानित सीट शेयर (243 विधानसभा सीटें)
- एनडीए: 131-150 सीटें (बीजेपी: 66-77, जेडीयू: 52-58, अन्य एनडीए सहयोगी: 13-15)
- महागठबंधन: 81-103 सीटें (राजद: 57-71, कांग्रेस: 11-14, अन्य: 13-18)
- जेएसपी: 4-6 सीटें
- एआईएमआईएम, बसपा और अन्य: 5-6 सीटें
जेवीसी सर्वेक्षण आंकड़ों से कई रुझान सामने आए हैं। हाल ही में राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस ने बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाली थी, लेकिन इसका असर राज्य के लोगों पर बेहद कम हुआ है। वोट चोरी जैसे मुद्दे लोगों को ज्यादा समझ नहीं आ रहे। वहीं, 106 निर्वाचन क्षेत्रों में विधायकों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बहुत अधिक है, जिसका अर्थ है कि NDA को नए उम्मीदवारों का चयन सावधानी से करना होगा।
राज्य में बीजेपी, पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ रही है। भले ही प्रशांत किशोर को कुछ ही सीटें मिलती दिख रही है, लेकिन लोगों के बीच वो चर्चा का विषय बने हुए हैं। बिहार के चुनावों का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन आगामी चुनाव में कानून और व्यवस्था, रोजगार, जातिगत अंकगणित और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे तय करेंगे कि बिहार पर किसका शासन होगा।
