Bengaluru Stampede: बेंगलुरु भगदड़ मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट से कई तीखे सवाल पूछे हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही है। इस मामले में कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार एक्शन पर एक्शन ले रही है, कई अधिकारी सस्पेंड हो चुके हैं, लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट इससे संतुष्ट नहीं दिख रहा है, यही कारण है कि कोर्ट ने सिद्दारमैया सरकार से कुल 9 सवाल पूछे हैं।
बेंगलुरु में मची भगदड़ में 11 लोगों की चली गई थी जान
ये भी पढ़ें- Bengaluru Stampede: कमिश्नर से लेकर इस्पेक्टर तक सस्पेंड, बेंगलुरु भगदड़ मामले में सिद्दारमैया सरकार का बड़ा एक्शन
कर्नाटक हाईकोर्ट के 9 सवाल
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सी. एम. जोशी की खंडपीठ ने इस त्रासदी के मद्देनजर अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को ये सवाल पूछे। सरकार को 10 जून तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नौ महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
- रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत का जश्न मनाने के लिए किसने अनुमति दी थी?
- यह निर्णय कब और कैसे लिया गया था?
- आयोजन स्थल के आसपास यातायात को नियंत्रित करने के लिए क्या उपाय किए गए?
- क्या आयोजकों ने आवश्यक अनुमति ली थी?
- भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी?
- मौके पर कौन सी चिकित्सा और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध थीं?
- क्या पहले से उपस्थित लोगों की संख्या का अनुमान लगाया गया था?
- क्या घायलों को घटनास्थल पर तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई? यदि नहीं, तो क्यों?
- और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में कितना समय लगा?
10 जून तक दाखिल करने होंगे जवाब
ये वे प्रश्न हैं जिनके उत्तर कर्नाटक सरकार को चार जून को हुई भगदड़ के संबंध में 10 जून तक उच्च न्यायालय में दाखिल करने होंगे। इस भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी। यह भगदड़ चार जून की शाम को चिन्नास्वामी स्टेडियम के सामने हुई, जहां बड़ी संख्या में लोग आरसीबी टीम की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) जीत के जश्न में भाग लेने के लिए उमड़े थे। इस घटना में 11 लोग मारे गए और 56 घायल हो गए।
कोर्ट ने SOP पर भी उठाए सवाल
पीठ ने खेल आयोजनों और इस पैमाने के सार्वजनिक समारोहों के लिए 50,000 से अधिक लोगों की सभाओं के प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अस्तित्व पर भी सवाल उठाया। राजनीतिक और आधिकारिक सूत्रों ने संकेत दिया कि इन कठिन सवालों और न्यायिक जांच के कारण ही राज्य सरकार ने बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त बी. दयानंद सहित पांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने का निर्णय लिया है।
कथित तौर पर निलंबन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, वरिष्ठ मंत्रियों, कानूनी सलाहकार ए.एस. पोन्नना और महाधिवक्ता के.एम. शशिकिरण शेट्टी की मौजूदगी में हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद किया गया।
