Karnataka News: उम्रकैद की सजा पाए एक कैदी को वर्ष 2018 में उच्चतम न्यायालय के आदेश की कथित तौर पर जालसाजी के जरिये रिहा कराने में मदद करने के आरोप में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। आरोपी एम. सोमशेखर उस समय बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के मुख्य अधीक्षक थे और वर्तमान में उपमहानिरीक्षक, (कारागार) उत्तर क्षेत्र, कलबुर्गी के पद पर तैनात हैं। पुलिस ने बताया कि दोषी की पत्नी को मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उसने आरोप लगाया कि केंद्रीय कारागार से अपने पति की रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए सोमशेखर ने उसका यौन शोषण किया था। पुलिस ने कहा कि इस आरोप की भी जांच की जा रही है।
कर्नाटक में डीआईजी गिरफ्तार।
2004 में हुई उम्रकैद की सजा
पुलिस के अनुसार, मामला इस साल मई में सामने आया, जब बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के मौजूदा अधीक्षक (प्रभारी) ने परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई कि एक दोषी कैदी को उच्चतम न्यायालय के कथित आदेश की जालसाजी करके 13 नवंबर 2018 को रिहा कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार, इसके बाद मामला दर्ज किया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि दोषी कैदी के खिलाफ चिकपेट पुलिस थाने में दर्ज मामले की सुनवाई त्वरित सुनवायी अदालत-1 में हुई थी और 12 जुलाई 2004 को उसे उम्रकैद की सजा तथा 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी
उन्होंने बताया कि आरोपी ने सजा रद्द कराने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी, लेकिन दोनों अदालतों ने उसकी सजा बरकरार रखी। अधिकारी ने बताया कि जांच में सामने आया कि उस समय केंद्रीय कारागार के दोषी कैदी अनुभाग में द्वितीय श्रेणी सहायक के रूप में पदस्थ रहे श्रीकांत एस. ने संबंधित दोषी कैदी की आपराधिक अपील के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा कथित रूप से जारी आदेश की एक प्रति जाली तरीके से तैयार की। अधिकारी ने बताया कि इसमें दिखाया गया कि उसकी रिहाई का आदेश दो नवंबर 2018 को पारित किया गया था।
कैदी की पत्नी से भी पूछताछ की गई
पुलिस ने बताया कि उक्त जाली आदेश के आधार पर दोषी कैदी को 13 नवंबर 2018 को केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान दोषी कैदी की पत्नी से भी पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, उसने बताया कि उस समय के मुख्य अधीक्षक ने भी उसके पति को केंद्रीय कारागार से रिहा कराने में मदद की थी। पुलिस ने श्रीकांत और दोषी कैदी की पत्नी दोनों को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने बताया कि जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि सोमशेखर ने मामले की जांच में सहयोग नहीं किया और प्रासंगिक जानकारी छिपाई। पुलिस ने बताया कि इसके बाद सोमशेखर को रविवार को हिरासत में लिया गया और अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने बताया कि आगे की जांच के लिए पूछताछ के वास्ते उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
(एजेंसी इनपुट)
