Riju Dutta Abhishek Banerjee Attack: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित नेता ऋजु दत्ता ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए ममता बनर्जी की तुलना 'धृतराष्ट्र' से कर दी। रिजु दत्ता ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के मोह में आंखें बंद कर ली हैं, जिसके कारण आज पूरी पार्टी गर्त में जा रही है।
निलंबन के बाद रिजु दत्ता के तेवर सख्त
अभिषेक बनर्जी पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए ऋजु दत्ता ने कहा, "युवराज का अब जेल में चक्की पीसने का समय आ गया है।" उन्होंने साफ संकेत दिया कि आने वाले दिनों में कानूनी कार्रवाई के चलते टीएमसी के इस दूसरे सबसे बड़े नेता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
वरिष्ठ नेताओं को किनारे करने का आरोप
रिजु दत्ता ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने पार्टी को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा, "कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने लंबे समय तक ममता बनर्जी का साथ दिया। लेकिन ममता दीदी ने धृतराष्ट्र बनकर अपनी आंखें मूंद लीं और एक ऐसे व्यक्ति को राजनीति में स्थापित करने के लिए सबको किनारे कर दिया, जो पार्षद बनने के भी लायक नहीं है।"
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: सड़क से संसद तक आर-पार, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी आंदोलन, 3 महीने तक चलेगा अभियान
रिजु दत्ता ने अभिषेक बनर्जी पर लगाए कई गंभीर आरोप
निलंबित नेता ने आगे कहा कि अभिषेक बनर्जी ने सालों तक सांसदों और विधायकों का अपमान किया, प्रवक्ताओं को गुलामों की तरह समझा और जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ बेहद खराब व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने जिस टीएमसी को अपने खून-पसीने से सींचा था, उसे अभिषेक ने सिर्फ पैसों के लालच में और अपने निजी फायदे के लिए मिट्टी में मिला दिया। सुवेंदु अधिकारी, तापस रॉय और निसिथ प्रमाणिक जैसे बड़े नेताओं को पार्टी से बाहर करने के पीछे भी उन्हीं का हाथ था।
कांग्रेस-टीएमसी विलय की खबरों को बताया नामुमकिन
कांग्रेस और टीएमसी के संभावित विलय की अफवाहों पर बात करते हुए रिजु दत्ता ने इसे कानूनी और तकनीकी रूप से पूरी तरह असंभव बताया। उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि दल-बदल कानून के तहत किसी भी पार्टी के विलय के लिए दो-तिहाई विधायकों और सांसदों की सहमति जरूरी होती है, जो मौजूदा बगावत को देखते हुए नामुमकिन है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विलय सिर्फ ममता दीदी के चाहने से नहीं होगा। इसके अलावा टीएमसी के लोगो और पार्टी के फंड में रखे करीब 1200-1300 करोड़ रुपये का क्या होगा? बंगाल में दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन तभी हो सकता है जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी, ममता और अभिषेक पर थोड़ी दया दिखाएं।
