बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर अंदरूनी कलह और विवाद गहरा गया है। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा (Manan Kumar Mishra) को एक पत्र भेजकर उनसे तत्काल पद छोड़ने और अधिकतम 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है। पत्र में काउंसिल के कामकाज, वित्तीय अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग
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पत्र में की गई प्रमुख मांगें
BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर पद त्यागने की स्पष्ट मांग की गई है। पत्र में लिखा गया है कि बार काउंसिल की एक आपातकालीन विशेष बैठक आयोजित की जाए और उठाए गए सभी मुद्दों से जुड़े रिकॉर्ड सदस्यों को बैठक से पहले उपलब्ध कराए जाएं। BCI और 'BCI Trust PEARL-First' के खातों का शुरुआत से लेकर अब तक का विशेष ऑडिट कराया जाए। यह ऑडिट किसी ऐसी स्वतंत्र फर्म से कराने की मांग की गई है जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के साथ सूचीबद्ध हो। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने का भी सुझाव दिया गया है। किसी भी लॉ कॉलेज, विश्वविद्यालय या उनके प्रबंधन से BCI या उससे जुड़े किसी भी ट्रस्ट द्वारा किसी भी प्रकार का योगदान या दान स्वीकार करने पर तुरंत रोक लगाई जाए।
चेयरमैन पर लगे गंभीर आरोप
पत्र के माध्यम से BCI चेयरमैन पर कई प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि मूल 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट' को निष्क्रिय कर BCI की लगभग 150 करोड़ रुपये की राशि एक नए बनाए गए ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी गई। BCI दफ्तर में कई नियुक्तियां बिना किसी पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के की गईं। इसके अलावा, काउंसिल द्वारा संचालित संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर चेयरमैन के परिजनों को बैठाने का भी आरोप है। मान्यता या नवीनीकरण की मांग करने वाले लॉ कॉलेजों से अनुचित तरीके से योगदान/फंड मांगने के आरोप लगाए गए हैं। स्टेट बार काउंसिलों में गुटबाजी को बढ़ावा देने और NALSAR विश्वविद्यालय के छात्रों से जुड़े मामलों में बिना संबंधित रिकॉर्ड पेश किए मनमाने निर्देश जारी करने का मुद्दा भी उठाया गया है।
वकीलों के भरोसे का भी सवाल
रेड्डी ने कहा कि अब मामला सिर्फ BCI के अंदर तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, BCI के बाहर वकीलों ने प्रदर्शन कर चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की है। पत्र में उन्होंने वकीलों के लिए Advocates Protection Act, बीमा सुविधा और लॉ कॉलेजों की साफ-सुथरी जांच जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि युवा वकीलों और कुछ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र संगठनों ने भी BCI के मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
2012 से चेयरमैन पद पर बने रहने पर सवाल
रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा के लंबे समय से BCI चेयरमैन रहने पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है। रेड्डी ने कहा कि मनन कुमार मिश्रा 2012 से लगातार इस पद पर हैं और 2025 में फिर लगातार एक और कार्यकाल के लिए चुने गए। रेड्डी का आरोप है कि इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पद पर बने रहने से चुनाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
