Assembly by elections result 2022: छह राज्यों में 07 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती आज (06 नवंबर) हो रही है। कड़ी सुरक्षा के बीच मतों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू हो रही है। बिहार में बीजेपी से अलग होकर आरजेडी के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने महागठबंधन की सरकार बनाई। उसके बाद यहां पहली चुनावी परीक्षा के नतीजे आने वाले है। बिहार विधानसभा की मोकामा और गोपालगंज सीट पर हुए उपचुनावों में आरजेडी के सामने बीजेपी है। अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी (मोकामा सीट) उन दिग्गज उम्मीदवारों में शामिल है जिनकी किस्मत का फैसला होना है। अनंत सिंह को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद बिहार की मोकामा सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा। गोपालगंज सीट से बीजेपी ने कुसुम देवी को मैदान में उतारा है जो दिवंगत विधायक सुभाष सिंह की पत्नी हैं।
विधानसभा उपचुनाव: 6 राज्यों के 7 सीटों पर वोटों की गिनती आज
उधर हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के परिवार का गढ़ कही जाने वाली हरियाणा की आदमपुर सीट भी शामिल है। भजन लाल के पोते भव्य बिश्नोई बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में थे। उनकी किस्मत का फैसला हो जाएगा। इसके अलावा महाराष्ट्र की अंधेरी (पूर्व) सीट, तेलंगाना की मुनुगोडे सीट, उत्तर प्रदेश की गोला गोकर्णनाथ सीट और ओडिशा की धामनगर सीट पर उपचुनाव के नतीजे घोषित होंगे। जिन सात सीट पर भाजपा और क्षेत्रीय पार्टियों के बीच मुकाबला है उनमें से तीन भगवा दल के पास थीं, जबकि दो सीट कांग्रेस के पास थीं। इसी तरह शिवसेना और राजद के पास एक-एक सीट थीं।
बिहार के उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और आरजेडी के बीच है, जबकि हरियाणा में भगवा दल का मुकाबला कांग्रेस, आईएनएलडी और आम आदमी पार्टी (आप) से है। भाजपा का तेलंगाना में मुकाबला तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) से, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से और ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) से है।
बीजेपी गोला गोकर्णनाथ सीट और धामनगर सीट बरकरार रखना चाहती है और इसने सहानुभूति पाने के लिए उन मौजूदा विधायकों के बेटों को मैदान में उतारा है जिनके निधन के कारण उपचुनाव हुआ। गोल गोकर्णनाथ सीट बीजेपी विधायक अरविंद गिरि के निधन के कारण छह सितंबर को रिक्त हो गई थी। इस सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस और बसपा हिस्सा नहीं ले रही हैं, इसलिए सपा उम्मीदवार और गोला के पूर्व विधायक विनय तिवारी और भाजपा के अमन गिरि के बीच सीधा मुकाबला है। धामनगर सीट पर इकलौती महिला उम्मीदवार बीजद की अबंती दास हैं, इस सीट पर बीजेपी विधायक बिष्णु चरण सेठी के निधन के कारण उपचुनाव हुआ। बीजेपी ने सेठी के बेटे सूर्यबंशी सुराज को मैदान में उतारा है।
भजन लाल के छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई के इस्तीफा देकर कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने के कारण आदमपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। आदमपुर सीट पर वर्ष 1968 से भजन लाल परिवार का कब्जा है। अदामपुर सीट से दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल नौ बार और उनकी पत्नी जस्मा देवी एक बार तथा उनके बेटे कुलदीप चार बार विधायक रहे।
मोकामा सीट पर इसके पहले एनडीए का कब्जा था, जबकि गोपालगंज सीट राजद के पास थी। मोकामा सीट से भाजपा पहली बार चुनाव मैदान में है, क्योंकि इसके पहले इसने यह सीट अपने सहयोगियों को दे दी थी। भाजपा और आरजेडी, दोनों ने ही स्थानीय बाहुबली नेताओं की पत्नी को मैदान में उतारा है। मोकामा सीट से बीजेपी ने अपना उम्मीदवार सोनम देवी को बनाया है।
बिहार की गोपालगंज सीट से बीजेपी ने कुसुम देवी को मैदान में उतारा है जो दिवंगत विधायक सुभाष सिंह की पत्नी हैं, यहां से राजद के उम्मीदवार मोहन गुप्ता और बसपा उम्मीदवार इंदिरा यादव हैं। इंदिरा पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के साले साधु यादव की पत्नी हैं। अंधेरी (पूर्व) से शिवसेना की रुतुजा लटके के उपचुनाव जीतने के आसार हैं, क्योंकि बीजेपी ने खुद को मुकाबले से बाहर कर लिया है।
मोकामा सीट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक अनंत सिंह को शस्त्र अधिनियम के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण अयोग्य करार दिए जाने के बाद खाली हुई थी, जबकि गोपालगंज में उपचुनाव कराने की जरूरत भाजपा विधायक सुभाष सिंह का निधन हो जाने के चलते पड़ी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ने और राजद नीत महागठबंधन में फिर से शामिल होने तथा राज्य में नयी सरकार का गठन करने के मद्देनजर यह उपचुनाव अहम माना जा रहा है।
दोनों सीट पर कुल 15 उम्मीदवार अपनी चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनमें से 9 उम्मीदवार गोपालगंज सीट पर, जबकि छह प्रत्याशी मोकामा सीट पर हैं। गोपालगंज में भाजपा की कुसुम देवी का मुकाबला राजद के मोहन गुप्ता से है। वहीं, मोकामा में भाजपा प्रत्याशी सोनम देवी, राजद की नीलम देवी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। नीलम अयोग्य करार दिए गए विधायक अनंत सिंह की पत्नी हैं।
मोकामा सीट 2005 से ही अनंत सिंह का मजबूत गढ़ रहा है। उन्होंने दो बार जदयू के टिकट पर इस सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने 2020 में आरजेडी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा, लेकिन शस्त्र अधिनियम के मामले में दोषी करार दिए जाने की वजह से वह विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिए गये थे।
