Assam Flood: जब चारों तरफ था सैलाब और जिंदगी पर मंडरा रहा था खतरा, तब इन ग्रामीणों ने 6 नावों से थामी हजारों जिंदगियों की डोर

असम के शिवसागर जिले में आई भीषण बाढ़ ने कई गांवों में तबाही मचा दी, जिससे सैकड़ों परिवार मुश्किल में फंस गए। ऐसे वक्त में छह देसी नावों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने मोर्चा संभाला और पांच गांवों से 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। अपनी जान की परवाह किए बिना ग्रामीणों का यह रेस्क्यू अभियान देर रात तक चलता रहा और बाढ़ में फंसे लोगों के लिए जीवन की उम्मीद बन गया।

Assam Flood: असम के शिवसागर जिले में 19 जुलाई को आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। नेपाली खूटी क्षेत्र में पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते घरों, दुकानों और गांवों में घुस गया। हालात इतने गंभीर हो गए कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों की छतों, मचान और पेड़ों की डालियों पर शरण लेनी पड़ी। ऐसे मुश्किल वक्त में स्थानीय ग्रामीणों का एक छोटा-सा समूह छह देसी नावों के सहारे लोगों के लिए जिंदगी की उम्मीद बन गया। ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ का पानी बेहद तेजी से बढ़ा था। स्थानीय लोगों ने अपनी नावों को राहत और बचाव के काम में लगा दिया। इन छह नावों में से कुछ नावें ग्रामीणों की निजी थीं और इन्हें किसी बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं किया गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों ने लगातार नावें चलाकर पांच गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। रेस्क्यू टीम के सदस्यों का दावा है कि उन्होंने करीब 1000 से अधिक लोगों की जान बचाई।

Assam Flood

सिर्फ छह नावें, हिम्मत और इंसानियत के भरोसे बाढ़ में उतर गए ग्रामीण

रेस्क्यू अभियान में शामिल लोगों ने क्या बताया?

रेस्क्यू अभियान में शामिल चौहान चौधरी ने बताया कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जब कई घर पानी की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए और लोग अंदर फंस गए, तब ग्रामीणों ने नावों के जरिए उन्हें बाहर निकालना शुरू किया। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। इस बचाव अभियान में शामिल कनहैया चौधरी ने बताया कि परिवार को सुरक्षित जगह पहुंचाने के बाद वह घर का जरूरी सामान लेने वापस लौटे थे। लेकिन तभी लगातार फोन आने लगे कि कई लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं और उन्हें तत्काल मदद की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने सामान जुटाने के बजाय दोबारा नाव लेकर राहत अभियान शुरू कर दिया।

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