Amit Malviya Targets Congress: बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए बिहार में उनके हालिया अभियान को राजनीतिक स्टंट बताया और दावा किया कि कांग्रेस पार्टी का 'वोट चोरी' का एजेंडा झूठा है। यह टिप्पणी उन्होंने ऐसे समय में की जब चुनाव आयोग ने बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) की प्रक्रिया पूरी करने और 7.42 करोड़ मतदाताओं वाली फाइनल लिस्ट जारी करने की घोषणा की।
अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधा। Photo-ANI
मालवीय ने क्या कहा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में मालवीय ने लिखा, 'जब चुनाव आयोग बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी कर लेता है और फाइनल वोटर लिस्ट जारी करता है, तो यह ध्यान रखना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी ने न तो किसी को शामिल करने और न ही हटाने के लिए निर्धारित फॉर्मेट में कोई शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं की।'
राहुल गांधी पर बड़ा आरोप
मालवीय ने कहा, 'इससे राहुल गांधी की गलत राजनीति का पर्दाफाश होता है।' उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी की यात्रा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के बारे में नहीं, बल्कि 'गैर-कानूनी प्रवासियों को बचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने' के बारे में थी।
'यह एजेंडा सिर्फ दिखावा'
उन्होंने आगे कहा, 'यह कथित 'वोट चोरी' का एजेंडा सिर्फ एक दिखावा है, आने वाली चुनावी हार को छिपाने और भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर लोगों के विश्वास को कम करने का एक बहाना है। यह जॉर्ज सोरोस की रणनीति का एक हिस्सा है, जिसे राहुल गांधी बेवकूफी से अपनी मुश्किल में फंसी पार्टी को बचाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।'
राहुल गांधी का आरोप
मालवीय की यह टिप्पणी वोटर लिस्ट संशोधन के खिलाफ कांग्रेस के अभियान को लेकर जवाब था। अगस्त में राहुल गांधी ने बिहार के 20 जिलों में 1300 किलोमीटर लंबी 'वोटर अधिकार यात्रा' की थी, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपाती और मनमाने तरीके से वोटर लिस्ट संशोधन करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस का आरोप है कि लाखों लोगों के नाम, जिनमें ज्यादातर गरीब, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे, वे गलत तरीके से सूची से हटा दिए गए।
चुनाव आयोग ने कर दी घोषणा
चुनाव आयोग ने मंगलवार को SIR प्रक्रिया के सफल समापन की घोषणा की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 24 जून तक वोटर लिस्ट में 7.89 करोड़ मतदाता थे। प्रारंभिक संशोधन के बाद, 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर 7.24 करोड़ रह गई, जिसमें 65 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे। दावे और आपत्तियों के बाद, अंतिम लिस्ट में 21.53 लाख नाम जोड़े गए, जिससे मतदाताओं की कुल संख्या 7.42 करोड़ हो गई।
