Aircel-Maxis Deal: पी चिदंबरम की बढ़ सकती हैं मुश्किलें! ED ने अभियोजन की मंजूरी के लिए दाखिल किया आवेदन

Aircel-Maxis Deal: ED ने यह जांच 2011 में CBI की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। मामला एयरसेल-मैक्सिस निवेश सौदे से जुड़ा है।

एयरसेल-मैक्सिस डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन) विशेष अदालत में दाखिल कर दी है। एजेंसी को यह मंजूरी 10 फरवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी से मिली, जिसके बाद राउज एवेन्यू स्थित PMLA अदालत में आदेश पेश किया गया।

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पी. चिदंबरम के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी (फाइल फोटो)

ED ने यह जांच 2011 में CBI की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। मामला एयरसेल-मैक्सिस निवेश सौदे से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उस समय वित्त मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) की मंजूरी नियमों के खिलाफ दी। कंपनी ने करीब 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3565.91 करोड़ रुपये) के विदेशी निवेश की अनुमति मांगी थी, जिसकी मंजूरी कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स स्तर पर होनी चाहिए थी।

ED का कहना है कि 20 मार्च 2006 को वित्त मंत्रालय स्तर पर ही मंजूरी दे दी गई, जबकि उस स्तर पर 600 करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव ही स्वीकृत किए जा सकते थे।जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मंजूरी के बदले कथित तौर पर 1.16 करोड़ रुपये की रकम कार्ति पी. चिदंबरम से जुड़ी कंपनियों-एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड-को मिली।

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