Gujarat Jail News: जेल... यह शब्द सुनते ही आंखों के सामने ऊंची दीवारें, लोहे की सलाखें और सन्नाटा उभर आता है। लेकिन गुजरात की कुछ जेलों में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर दिखाई दे रही है। यहां कैदी सिर्फ सजा नहीं काट रहे, बल्कि किताबों के जरिए अपनी जिंदगी दोबारा लिखने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य की अलग-अलग जेलों में बंद 44 कैदियों ने इस साल कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाएं पास (Gujarat board exam prisoners) कर एक नई मिसाल पेश की है। इनमें 22 कैदी दसवीं और 22 कैदी बारहवीं की परीक्षा में सफल हुए हैं। जेल प्रशासन की पहल, लगातार काउंसलिंग और पढ़ाई के लिए बनाए गए सकारात्मक माहौल ने कई कैदियों को अंधेरे से बाहर निकालने का काम किया है। इंसान को दूसरा मौका मिलना चाहिए या नहीं, इस पर दुनिया सदियों से बहस कर रही है। लेकिन यहां कुछ लोगों ने उत्तरपुस्तिका में अपने जवाब लिख दिए।
गुजरात की जेलों में 44 कैदियों ने पास की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा
जेल परिसर में ही परीक्षा केंद्र की व्यवस्था
राज्य के गृह राज्यमंत्री हर्ष सांघवी (Harsh Sanghavi) के नेतृत्व और गुजरात पुलिस प्रमुख के. एल. एन. राव (K. L. N. Rao) के मार्गदर्शन में जेल विभाग ने कैदियों के पुनर्वास के लिए शिक्षा को बड़ा माध्यम बनाया है। परीक्षा फॉर्म भरवाने से लेकर किताबें, अध्ययन सामग्री, विषय विशेषज्ञों के लेक्चर और जेल परिसर में ही परीक्षा केंद्र की व्यवस्था तक, हर स्तर पर सहयोग दिया गया। एक कैदी ने भावुक होकर कहा कि सजा मिलने के बाद उसे लगा था कि जिंदगी खत्म हो चुकी है। लेकिन जेल में चल रहे 'रेडियो प्रिजन' कार्यक्रम, वेलफेयर ऑफिस और अधिकारियों की प्रेरणा ने उसे फिर से पढ़ाई की ओर मोड़ा। परीक्षा पास करने के बाद उसे वर्षों बाद 'जिंदा होने' जैसा एहसास हुआ।
जेल अधिकारियों की काउंसलिंग और लगातार प्रोत्साहन
दूसरे कैदी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। जेल आने के बाद वह डिप्रेशन में चला गया, लेकिन जेल अधिकारियों की काउंसलिंग और लगातार प्रोत्साहन से उसने दोबारा किताबें उठाईं और अब परीक्षा में सफल होकर अपने भविष्य को नए नजरिए से देख रहा है। बारहवीं पास करने वाले एक कैदी ने कहा कि जेल में रहते हुए भी उसके सपने खत्म नहीं हुए हैं। वह सप्ताह में दो दिन संगीत की क्लास लेता है और बाहर निकलने के बाद गायक बनना चाहता है। सलाखों के पीछे बैठे लोग भी सपने देखते हैं। फर्क बस इतना है कि उनके सपनों की आवाज अक्सर बाहर तक नहीं पहुंचती।
जेल प्रशासन ने कैदियों के लिए आधुनिक लाइब्रेरी और ऑडियो बुक जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं। इसके अलावा शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित लेक्चर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि कैदी पढ़ाई से जुड़े रहें और मानसिक रूप से सकारात्मक बन सकें। डीजीपी के. एल. एन. राव (K. L. N. Rao) ने परीक्षा में सफल सभी 44 कैदियों को बधाई देते हुए कहा कि जेल विभाग द्वारा उन्हें प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही कैदियों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कैदियों ने क्या कहा?
कैदी 1: हम बैरक के अंदर बैठे थे और रेडियो के अंदर घोषणा की गई कि भाई जिसे परीक्षा देनी है, उसके लिए आप फॉर्म भर सकते हैं। फिर मुझे लगा कि 12वीं की परीक्षा दे दूं, तो फिर उसका फॉर्म भरवाया। और सभी साहबों का साथ-सहयोग बहुत अच्छा मिला। तैयारी करने के लिए उन लोगों ने लाइब्रेरी में एकांत में सिखाया, पढ़ाने के लिए यहाँ ले जाते थे। पढ़ाने के लिए पूरी तरह से जो हमें किताबें, कॉपियां और जो सुविधाएं दी जाती हैं, वो सभी सुविधाएँ हमें दीं और बहुत अच्छा साथ-सहयोग मिला हमें।
कैदी 2: यहां से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला, विशेष रूप से एसपी साहब गौरव अग्रवाल साहब, उन्होंने मुझे बहुत सहयोग किया है। क्योंकि आगे मुझे जो पढ़ाई करनी थी, उसके लिए साहब ने मुझे प्रोत्साहित किया कि भाई तू आगे कुछ पढ़ाई कर, आगे कुछ बढ़। क्योंकि बाहर की लाइफ में मुझे कुछ पता नहीं था कि बाहर जाकर क्या करूंगा। यहीं से पता चला कि अब मेरे पास एक मौका है, मैं यहां कुछ कर सकता हूं और 10वीं की परीक्षा देने के लिए मुझे प्रोत्साहित किया था। यहां आदर्श विद्याविहार से किरणभाई पटेल करके आते थे, प्रिंसिपल साहब। उन्होंने हमारा फॉर्म भरा, हमें किताबें दीं, फिर लाइब्रेरी की सुविधा दी। उससे हमें सब सीखने को मिला, हमने पढ़ाई की और फिर मैंने परीक्षा दी अभी 10वीं की और 10वीं की परीक्षा में मैं पास हो गया हूं। यहां गायन की क्लास भी होती है, वो भी मैंने अभी जॉइन की है और जब भी मैं बाहर निकलूंगा, सिंगर बनकर बाहर आऊंगा।
कैदी 3: मैं 9वीं पास था और उसके बाद मैं जरा भी पढ़ा नहीं। अंदर आकर मैंने 10वीं की बोर्ड की परीक्षा का फॉर्म भरा। उसके अंदर मुझे लाइब्रेरी की ओर से, जेल की तरफ से किताबें और ऐसी बहुत सारी सुविधाएँ दी गईं। और मुझे इतना कुछ सिखाया गया कि मुझे गणित जरा भी नहीं आता था और मैं आज उसी विषय के अंदर 47% से पास हुआ। एक साहब आते थे जिन्होंने हमें बहुत अच्छी तरह से एक-एक सवाल, एक-एक महत्वपूर्ण प्रश्न, हर चीज हमें दी। हमें यहां लाइब्रेरी के अंदर से असाइनमेंट भी दिया, जिस असाइनमेंट के अंदर इतने अच्छे और महत्वपूर्ण प्रश्न थे जो हमने दिमाग में याद रखे। जो हमने सवाल सीखे, वो सवाल हमें बहुत काम आए और वही प्रश्न हमारी 10वीं की बोर्ड की परीक्षा में आए और उसके अंदर हम बहुत अच्छी तरह से पास हो गए।
कैदी 4: लैपटॉप और टैबलेट में पढ़ना होता है, कंप्यूटर में। अपनी तरह से प्रैक्टिस करनी होती है, पढ़ने-लिखने की। कड़ी मेहनत की और फिर परीक्षा दी। जेल की तरफ से किताबें और सब कुछ अंदर ही मिलता है, बाहर से कुछ मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ती, साहब ही सब भेज देते हैं।
