बंटवारा 1947: सिर्फ 5 हफ्ते का समय और जमीन के साथ दिलों में भी खिंच गई रेडक्लिफ लाइन

15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 2 दिन बाद 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन के जरिए बंटवारे की लाइन भी सामने आ गई। न पहले न बाद में कभी भारत आए सिरिल रेडक्लिफ ने सिर्फ पांच हफ्तों में भारत-पाकिस्तान की सीमाएं तय कर दी थी।

बंटवारा 1947: एक ऐसे शख्स ने 1947 में देश का बंटवारा किया, जो न उससे पहले और न उसके बाद कभी भारत आया। उस शख्स ने इतने बड़े विशाल देश को जिसमें आज के पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल थे, की संस्कृति और भूगोल को जाने बिना दो टुकड़ों में बांट दिया। यही नहीं उसे इतना बड़ा विभाजन करने के लिए सिर्फ 5 हफ्ते का ही समय मिला। जबकि वह शख्स भारत के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। देश आजाद तो 15 अगस्त 1947 को हो गया था, लेकिन उस शख्स ने मैप पर जो रेखाएं खींचीं थीं वह आज ही के दिन यानी 17 अगस्त को सामने आईं। फिर यह रेखाएं जमीन पर उतारी गईं और भारत के दो टुकड़े हो गए, जिसका टूटा हुआ हिस्सा पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान) कहलाए। उस शख्स का नाम सिरिल रेडक्लिफ था। इसी शख्स के नाम पर भारत और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को रेडक्लिफ लाइन (Radcliffe Line) कहा जाता है।

redcliffe Line 1947.

5 हफ्तों में खिंच गई बंटवारे की सीमा रेखा

भारत के बंटवारे के लिए रेडक्लिफ को जुलाई-अगस्त 1947 के 5 हफ्ते दिए गए थे। इन्हीं पांच हफ्तों के दौरान उन्हें पश्चिम में पंजाब और पूर्व में बंगाल का बॉर्डर तय करना था। यह जानना भी रोचक है कि देश के आजाद होने के 48 घंटे बाद बंटवारे का नक्शा जारी क्यों किया गया। दरअसल यह तय हो चुका था कि अंग्रेज भारत छोड़कर वापस ब्रिटेन लौंटेंगे और ग्लोब पर दो नए देशों का जन्म होगा। बंटवारे की गंध हवा में फैल चुकी थी और इसी के साथ देश में सांप्रदायिक दंगे भी शुरू हो चुके थे। मुस्लिम लीग की तरफ से ज्यादा से ज्यादा इलाकों को अपने पाले में लेने के लिए वहां हिंसा भड़काई जाने लगी। ऐसे में तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन नहीं चाहते थे कि उन पर इन दंगों (बंटवारे की हिंसा) का इल्जाम आए। इसलिए उन्होंने बंटवारे का नक्शा 17 अगस्त 1947 को जारी किया।

End of Feed