Sawan Fasting: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत या पूरे सावन में किसी न किसी रूप में उपवास रखते हैं। व्रत जहां आस्था और आत्मसंयम से जुड़ा है, वहीं लगातार कई दिनों तक कम खाना या भोजन के बीच लंबा अंतर शरीर पर असर भी डाल सकता है। इन दिनों में जब व्रत में पानी, फल, दूध या सीमित आहार लिया जाता है, तो शरीर में ऊर्जा, इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
सावन में व्रत के साथ रखें सेहत का भी ख्याल!
ऐसे में व्रत रखने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन-से शारीरिक संकेत सामान्य कमजोरी हो सकते हैं और किन लक्षणों को शरीर की चेतावनी मानना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ हेल्थ के लक्षणों (Health Checklist) के बारे में...
1. बार-बार चक्कर आना
व्रत के दौरान लंबे समय तक कुछ न खाने से ब्लड शुगर कम हो सकता है। वहीं पर्याप्त पानी न पीने पर डिहाइड्रेशन और लो ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है। अगर उठते समय लगातार चक्कर आएं, आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे या ऐसा महसूस हो कि शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। बैठ जाएं, आराम करें और शरीर को पर्याप्त तरल व ऊर्जा देने पर ध्यान दें।
2. बहुत ज्यादा कमजोरी और हर समय थकान
व्रत में कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में कम हो सकती है। लगातार कई दिनों तक ऐसा होने पर शरीर में कमजोरी, सुस्ती और काम करने की क्षमता में कमी महसूस हो सकती है। अगर थोड़ी-सी फिजिकल एक्टिविटी के बाद भी अत्यधिक थकान होने लगे, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य काम करने में परेशानी हो या दिनभर ऊर्जा कम महसूस हो, तो अपने व्रत की डाइट पर दोबारा विचार करना जरूरी है।
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3. दिल की धड़कन तेज होना
कभी-कभी लंबे समय तक खाली पेट रहने, पर्याप्त तरल न लेने या शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन से धड़कन तेज महसूस हो सकती है। अगर व्रत के दौरान बार-बार दिल तेजी से धड़कता महसूस हो, धड़कन अनियमित लगे या इसके साथ चक्कर, कमजोरी, सांस फूलना या सीने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।
4. तेज सिरदर्द होना
व्रत के दौरान सिरदर्द कई कारणों से हो सकता है। लंबे समय तक भोजन न करना, कम पानी पीना, नींद पूरी न होना, चाय-कॉफी का अचानक कम हो जाना या ब्लड शुगर में बदलाव इसके कारण हो सकते हैं।
हल्का सिरदर्द आराम और पर्याप्त तरल लेने के बाद ठीक हो सकता है, लेकिन अगर सिरदर्द लगातार बना रहे, बहुत तेज हो जाए या इसके साथ उल्टी, भ्रम, कमजोरी अथवा देखने में परेशानी जैसी समस्या हो, तो चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
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5. पेशाब का रंग और मात्रा में बदलाव
व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी का पता लगाने का एक आसान तरीका पेशाब पर ध्यान देना है। बहुत कम पेशाब आना या उसका रंग सामान्य से काफी गहरा होना डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है।
सावन में उमस और बारिश के कारण प्यास का एहसास हमेशा बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन शरीर को फिर भी पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। इसलिए केवल प्यास लगने का इंतजार न करें।
6. मांसपेशियों में ऐंठन या हाथ-पैर कांपना
लगातार कम खाना लेने पर शरीर में सोडियम, पोटैशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन में बदलाव हो सकता है। इसका असर मांसपेशियों पर दिखाई दे सकता है। अगर बार-बार पैरों में ऐंठन हो, हाथ-पैर कांपें या मांसपेशियों में असामान्य कमजोरी महसूस हो, तो अपने खान-पान और तरल पदार्थों की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।
7. चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी
व्रत का असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि मूड और मानसिक एकाग्रता पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक कम ऊर्जा मिलने से चिड़चिड़ापन, बेचैनी, नींद आने या काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है। अगर ये लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो व्रत के तरीके में बदलाव करना बेहतर है।
कब लें डॉक्टर की सलाह
ध्यान रखें कि हर व्यक्ति के शरीर की जरूरत अलग होती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लंबे व्रत करने से पहले या भोजन सीमित करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा और भोजन के समय में बदलाव नहीं करना चाहिए। कुछ दवाओं को खाली पेट लेने से परेशानी बढ़ सकती है।
