कुछ लोगों को बहुत तेज खाने की आदत होती है। कई बार तो हाथ में मोबाइल और सामने टीवी चल रहा होता है और पता ही नहीं चलता कि प्लेट कब खाली हो गई। वहीं मिर्जापुर के कालीन भैया उर्फ अभिनेता पंकज त्रिपाठी की खाने की आदत ऐसे लोगों से बिल्कुल उलट है। पंकज बताते हैं कि वह इन दिनों अपना खाना खाने में करीब 30 मिनट लगाते हैं।
पंकज त्रिपाठी का फिटनेस सीक्रेट (Photo: Amazon Prime)
डॉक्टरों के मुताबिक धीरे खाना, अच्छी तरह चबाना और शरीर के पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देना, महज पेट भरने से ज्यादा जरूरी है। खाना शुरू करने के तुरंत बाद दिमाग को यह पता नहीं चल पाता है कि पेट भर चुका है। डाइटीशियन्स के अनुसार, दिमाग को पेट भरा होने का संकेत मिलने में लगभग 20 से 30 मिनट लग सकते हैं। यही वजह है कि बहुत तेजी से खाने पर जरूरत से ज्यादा खाना खा लेने की संभावना बढ़ सकती है। कुछ देर बाद जब शरीर पेट भरने का संकेत देता है, तब तक हम आवश्यकता से अधिक खा चुके होते हैं।
पेट और दिमाग के बीच चलती है बातचीत
जब हम खाना खाते हैं तो पेट फैलने के साथ शरीर दिमाग को संकेत भेजना शुरू करता है। इसके बाद आंतों से कुछ हार्मोन निकलते हैं, जो भूख और संतुष्टि को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया तुरंत नहीं होती। इसलिए खाने के बीच शरीर को समय देना जरूरी है, ताकि दिमाग यह समझ सके कि अब और खाने की जरूरत है या नहीं।
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जल्दी खाने से होती है परेशानी
बहुत तेजी से खाने पर अपच ये पेट से जुड़ी दूसरी परेशानी हो सकती है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक तेजी से खाने और बड़े निवाले लेने पर भोजन के साथ ज्यादा हवा भी निगलते हैं, जिससे डकार और पेट फूलने की समस्या होती है।
खाना सिर्फ पेट भरना नहीं है
धीरे खाने का फायदा सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं माना जाता। डाइटीशियन्स के मुताबिक धीमी रफ्तार से खाना खाने से व्यक्ति भोजन पर ज्यादा ध्यान देता है और भूख कम होने के संकेतों को बेहतर तरीके से महसूस कर सकता है। इससे खाने के साथ हमारा रिश्ता भी ज्यादा सजग और सहज हो सकता है।
कैसे डालें धीरे खाने की आदत?
इसके लिए घड़ी देखकर खाना जरूरी नहीं है। छोटी मात्रा में निवाला लें और उसे अच्छी तरह चबाएं। हर निवाले के बीच थोड़ा रुकें। खाते समय मोबाइल या दूसरी स्क्रीन से दूरी बनाएं और इस बात पर ध्यान दें कि पेट कब संतुष्ट महसूस करने लगा है। सबसे जरूरी है कि खाना जल्द खत्म करने की आदत को धीरे-धीरे बदलें।
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पंकज त्रिपाठी की 30 मिनट वाली आदत का असली सबक शायद यही है कि खाने को भी दिन की भागदौड़ से बाहर एक छोटा सा ठहराव दिया जाए। इससे ना सिर्फ भोजन का स्वाद मिलेगा, सेहत के लिए भी ये काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
