स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जहां एक ओर AI का इस्तेमाल जटिल बीमारियों के इलाज और डायग्नोसिस में हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ अस्पताल और डॉक्टर इसका दुरुपयोग मरीजों को आकर्षित करने के लिए कर रहे हैं। इसी डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। NMC ने स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टर और अस्पताल अब AI जनरेटेड या फर्जी पेशेंट टेस्टिमोनियल्स (मरीजों के रिव्यू और अनुभव) का इस्तेमाल विज्ञापनों में नहीं कर सकेंगे।
AI टेस्टिमोनियल्स पर लगा बैन, तोड़ा नियम तो होगी कार्रवाई (Photo: iStock)
क्या है NMC का नया फरमान?
नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी डॉक्टर, क्लीनिक या अस्पताल को AI तकनीक या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके नकली मरीज या फर्जी केस स्टडी तैयार करने की अनुमति नहीं होगी।
AI टेस्टिमोनियल्स पर पूर्ण प्रतिबंध: AI के जरिए बनाए गए फर्जी वीडियो, वॉइस-ओवर, या लिखित रिव्यू को प्रमोशन के लिए इस्तेमाल करना अब गैर-कानूनी और अनैतिक माना जाएगा।
पारदर्शिता और सत्यता अनिवार्य: अस्पताल या डॉक्टर केवल उन्हीं मरीजों के अनुभव साझा कर सकते हैं, जो वास्तविक हैं और जिन्होंने लिखित में इसकी सहमति दी है।
क्यों पड़ी इस बैन की जरूरत?
आज के दौर में अधिकांश मरीज किसी भी डॉक्टर या अस्पताल के पास जाने से पहले उनके ऑनलाइन रिव्यूज और स्टार रेटिंग्स देखते हैं। इसी का फायदा उठाकर कई हेल्थकेयर ब्रांड्स और डॉक्टर AI टूल्स का इस्तेमाल कर ऐसे परफेक्ट रिव्यूज तैयार कर रहे थे, जो असल में कभी अस्तित्व में ही नहीं थे।
AI जनरेटेड टेस्टिमोनियल्स में अक्सर बीमारियों के इलाज के ऐसे दावे किए जाते हैं जो हकीकत में संभव नहीं होते। इससे मरीज गुमराह होकर गलत या महंगे इलाज का चुनाव कर लेते हैं। दूसरी तरफ चिकित्सा का पेशा पूरी तरह से विश्वास और नैतिकता पर टिका है। तकनीक की आड़ में झूठा प्रचार करना डॉक्टरों के पेशेवर आचरण के खिलाफ है। इसके इतर फर्जी रिव्यूज से प्रभावित होकर मरीज कई बार गंभीर बीमारियों के इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।
मरीजों और डॉक्टरों के लिए संदेश
NMC का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। NMC ने चेतावनी दी है कि जो भी डॉक्टर या चिकित्सा संस्थान इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नेशनल मेडिकल कमीशन कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने आम जनता को भी सलाह दी है कि वे केवल ऑनलाइन रिव्यूज या विज्ञापनों के आधार पर किसी डॉक्टर का चयन न करें। डॉक्टर्स की क्वालिफिकेशन और उनके आधिकारिक अनुभव की जांच जरूर करें।
कुल मिलाकर, NMC का यह फैसला यह साफ संदेश देता है कि स्वास्थ्य सेवा में AI का इस्तेमाल मरीजों की जान बचाने के लिए होना चाहिए, न कि उन्हें गुमराह करके व्यापार बढ़ाने के लिए।
