रात का समय आराम करने के लिए होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए जैसे ही वे बिस्तर पर जाते हैं, पैरों की परेशानी शुरू हो जाती है। कभी पिंडलियों में खिंचाव महसूस होता है, तो कभी जांघों में भारीपन या दर्द परेशान करने लगता है। दिनभर काम करने के बाद शरीर बिस्तर पर आराम चाहता है, लेकिन पैरों की तकलीफ नींद को दूर कर देती है। ऐसे में हर किसी को तुरंत कोई दवा लेने की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों पर ध्यान देना भी मददगार हो सकता है।
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फिटनेस और न्यूट्रिशन विशेषज्ञ रुजुता दिवेकर ने रात में पैरों से जुड़ी परेशानी को लेकर कुछ सरल गतिविधियों का सुझाव दिया है। इनमें खाने के बाद हल्की सैर, वज्रासन और एक आसान स्ट्रेच शामिल हैं। इनका मकसद शरीर को आराम देना, रात की दिनचर्या को बेहतर बनाना और पैरों में जकड़न को कम करने में मदद करना है। हालांकि लगातार या तेज दर्द को केवल घरेलू उपाय मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
1. डिनर के बाद करें हल्की वॉक
रात के खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने के बजाय कुछ देर हल्का चलना एक अच्छी आदत हो सकती है। रुजुता दिवेकर करीब 15 से 20 मिनट की आरामदायक वॉक करने की सलाह देती हैं।
यहां ध्यान रखने वाली बात है कि इसे एक्सरसाइज की तरह तेज गति से करने की जरूरत नहीं है। आपकी चाल इतनी सहज हो कि चलते हुए आप सामान्य रूप से बातचीत कर सकें।
डिनर के बाद हल्की गतिविधि पाचन और शरीर की सामान्य सक्रियता के लिए उपयोगी हो सकती है। साथ ही लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय थोड़ा चलना पैरों को भी सक्रिय रखता है।
2. खाने के बाद कुछ देर वज्रासन
अगर आपके लिए आरामदायक हो तो भोजन के बाद कुछ समय वज्रासन में बैठने की आदत भी बनाई जा सकती है। जमीन पर बैठना मुश्किल लगे तो अपनी सुविधा के अनुसार कुशन या तकिए का सहारा लिया जा सकता है।
इस दौरान शरीर को जबरदस्ती किसी मुद्रा में रखने की जरूरत नहीं है। आराम सबसे जरूरी है। घुटनों या पैरों में पहले से समस्या है तो वज्रासन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
3. पैरों के लिए करें आसान स्ट्रेच
तीसरा तरीका पैरों और जांघों को हल्का स्ट्रेच देने से जुड़ा है। इसके लिए पेट के बल लेटकर पैरों को पीछे की तरफ किसी मुलायम तकिए या बोल्स्टर पर रखा जा सकता है।
इसके बाद पैरों और जांघों को अपनी क्षमता के अनुसार हल्का ऊपर उठाकर कुछ सेकंड रुकने की कोशिश करें। करीब 10 तक गिनना पर्याप्त हो सकता है। इस दौरान सामने की जांघों में हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है। यह एक्सरसाइज करते समय दर्द को नजरअंदाज करके शरीर पर जोर नहीं डालना चाहिए। स्ट्रेच हल्का और नियंत्रित होना चाहिए।
हालांकि ध्यान रखें कि, अगर पैरों का दर्द बार-बार होता है, एक ही पैर में अचानक सूजन या लालिमा आती है, सुन्नपन रहता है या चलने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हर तरह के पैर दर्द का कारण केवल थकान या दिनभर की गतिविधि नहीं होता।
