बिना तार का Pacemaker क्या होता है? दिल के मरीजों के लिए क्यों माना जा रहा गेम-चेंजर

Leadless Pacemaker: दिल की धड़कन बहुत धीमी हो जाना यानी ब्रैडीकार्डिया कई बार गंभीर समस्या बन सकता है। ऐसे मरीजों के लिए अब बिना तार वाला यानी लीडलेस पेसमेकर एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। यह छोटा सा डिवाइस सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है और पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में कई मामलों में ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। जानिए क्या है यह नई तकनीक, कैसे काम करती है और किन मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

Leadless Pacemaker: दिल की धड़कन का सामान्य और नियमित रहना शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। लेकिन कई लोगों में दिल बहुत धीरे-धीरे धड़कने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में ब्रैडीकार्डिया (Bradycardia) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को चक्कर आना, कमजोरी, थकान या बेहोशी तक हो सकती है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो डॉक्टर अक्सर पेसमेकर लगाने की सलाह देते हैं। पहले जो पेसमेकर लगाए जाते थे, उनमें तार यानी लीड होती थी। लेकिन अब मेडिकल टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव आया है और लीडलेस पेसमेकर (Leadless Pacemaker) यानी बिना तार वाला पेसमेकर सामने आया है। इसे दिल के मरीजों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या होता है वायरलेस पेसमेकर

क्या होता है वायरलेस पेसमेकर

क्या होता है लीडलेस पेसमेकर

लीडलेस पेसमेकर एक बहुत छोटा मेडिकल डिवाइस होता है, जो दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। पारंपरिक पेसमेकर की तरह इसमें अलग से तार नहीं होते। यह डिवाइस सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है और वहीं से इलेक्ट्रिकल सिग्नल देकर दिल को सही गति से धड़कने में मदद करता है। आकार में यह लगभग एक बड़े कैप्सूल जितना होता है, इसलिए इसे शरीर के अंदर लगाने की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है।

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