Family Health and Fitness Day: माता-पिता होने के नाते हम सभी यहचा हते हैं कि हमारा बच्चा हमेशा स्वस्थ, एक्टिव और फिट रहे। इसके लिए हम उन्हें अच्छे स्कूल, अच्छा खाना और कई तरह की सुविधाएं देने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन कई बार एक जरूरी बात नजरअंदाज हो जाती है। बच्चों की आदतें सिर्फ उन्हें समझाने से नहीं बदलतीं, बल्कि वे घर में जो देखते हैं, वही सीखते हैं। हम सभी को यह समझने की जरूरत है कि अगर माता-पिता खुद अस्वस्थ जीवनशैली अपना रहे हैं, तो उसका असर हमारे बच्चों की सेहत (Child Health) पर भी पड़ना तय है।
पेरेंट्स की आदतें बच्चों की सेहत पर डालती हैं बुरा असर
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम की कंसल्टेंट डॉक्टर और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा गोयल भी मानते हैं कि बच्चों की फिटनेस में परिवार की भूमिका बहुत बड़ी होती है। इसलिए बच्चों को बदलने से पहले पेरेंट्स को अपनी कुछ आदतों पर ध्यान देना चाहिए।
बच्चे भी आपकी आदतें अपनाते हैं
डॉ. दीक्षा कहती हैं कि अक्सर माता-पिता बच्चों से कहते हैं कि बाहर जाकर खेलो, मोबाइल कम चलाओ और स्वस्थ खाना खाओ। अब आप ही सोचकर देखिए, अगर वही माता-पिता खुद घंटों फोन पर लगे रहते हैं या पूरे दिन बैठे रहते हैं, तो क्या बच्चे उनकी बातों को गंभीरता से लेंगे? आपको यही समझना है कि बच्चे अपने आसपास देखकर सीखते हैं। इसलिए अगर घर में एक्टिव रहने की आदत होगी, तो बच्चे भी उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।
हर समय जंक फूड खाना बन सकता है परेशानी
आजकल व्यस्त जीवन में बाहर का खाना मंगवाना आसान लगने लगा है। पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और मीठे ड्रिंक्स कई घरों में आम हो गए हैं। लेकिन समस्या तब होती है जब यह कभी-कभार की बजाय रोजमर्रा की आदत बन जाए। बता दें कि जब बच्चे बार-बार ऐसा खाना देखते और खाते हैं, तो फल, सब्जियां और घर का साधारण खाना उन्हें कम पसंद आने लगता है। ऐसे में धीरे-धीरे इसका असर उनकी फिटनेस पर दिखने लगता है।
ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों को भी बना रहा है सुस्त
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में मोबाइल, टीवी और लैपटॉप अब जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन जब परिवार के सभी सदस्य अपना ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने बिताने लगते हैं, तो बच्चों का खेलना-कूदना कम हो जाता है। ध्यान रखें कि बाहर दौड़ना, साइकिल चलाना और दोस्तों के साथ खेलना बच्चों के विकास के लिए जरूरी है। अगर उनकी जगह सिर्फ मोबाइल ले ले, तो शरीर धीरे-धीरे कम एक्टिव होने लगता है।
परिवार में एक्टिव माहौल बनाना जरूरी
डॉ. दीक्षा की मानें तो अगर माता-पिता सुबह या शाम टहलने जाएं, छुट्टी के दिन बच्चों के साथ पार्क में समय बिताएं या कोई खेल खेलें, तो बच्चे भी उसमें रुचि लेने लगते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं है। बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी एक्टिविटीज जैसे रोज थोड़ा चलना, सीढ़ियां चढ़ना, पार्क में खेलना और शरीर को सक्रिय रखना भी अच्छी फिटनेस का हिस्सा है।
बदलाव की शुरुआत खुद से करें
अगर आपको अपने बच्चों को स्वस्थ बनाना है तो सबसे पहले घर का माहौल बदलना होगा। आपके परिवार की खाने की अच्छी आदतें, सीमित स्क्रीन टाइम, समय पर सोना और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी छोटी-छोटी बातें बड़ा फर्क ला सकती हैं।
याद रखिए, बच्चे वही करते हैं जो वे रोज अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा फिट और स्वस्थ रहे, तो बदलाव की शुरुआत खुद से करें। यही सबसे आसान और सबसे असरदार तरीका है।
