Explained Heatwave Affect: मई के महीने में हीटवेव का अलर्ट आ गया है। लू के गर्म थपेड़ों के साथ इससे होने वाली परेशानियों के लक्षण भी नजर आ रहे हैं। इन दिनों कई जगहों पर तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। मौसम में गर्माहट के साथ ही डिहाइड्रेशन, हीट एक्सॉशन, हीट स्ट्रोक और कई दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम तेजी से बढ़ने लगती हैं। हालांकि हीटवेव का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता है। इसका असर बच्चों, युवाओं, ऑफिस जाने वालों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों अलग-अलग तरीके से दिखाई देता है। हमारी उम्र, लाइफस्टाइल, काम का प्रकार और हेल्थ कंडीशन यह तय करती है कि हमारे ऊपर गर्मी का असर कितना गंभीर हो सकता है।
हीटवेव का सेहत पर वार
आइए जानते हैं कि हीटवेव अलग-अलग एज ग्रुप और अलग-अलग हेल्थ कंडीशन वाले लोगों को कैसे प्रभावित करती है और इस दौरान किन सावधानियों (Heatwave Safety Tips) से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं हीटवेव से बचाव का फुल प्रूफ प्लान।
बुजुर्गों पर हीटवेव का क्या असर होता है
इस सवाल का जवाब देते हुए सीके बिड़ला हॉस्पिटल की डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, डॉ. मनीषा अरोड़ा कहती हैं कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की टेंपरेचर कंट्रोल करने की क्षमता कम होने लगती है। यही वजह है कि बुजुर्गों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा और लोगों की तुलना में ज्यादा रहता है। इसके अलावा बुजुर्गों में पहले से मौजूद कुछ बीमारियां भी हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती हैं जिसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे बुजुर्गों के लिए हीटवेव ज्यादा खतरनाक हो सकती है क्योंकि कई दवाइयां भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा देती हैं।
बुजुर्गों में दिखने वाले हीटवेव के मुख्य लक्षण
- भ्रम या कन्फ्यूजन
- सांस फूलना
- कमजोरी महसूस होना
- अचानक चक्कर आना
- बेहोशी की कंडिशन
क्या करें
हीटवेव के दौरान बुजुर्ग व्यक्ति को कभी अकेला न छोड़ें। उन्हें समय-समय पर पानी या ओआरएस पिलाते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। शुगर होने की स्थिति में पहले से ही तैयारी करके रखें। कमरे को ठंडा, हवादार और आरामदायक रखें। ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन देने से बचें, हल्का और पौष्टिक खाना ही खाने के लिए दें।
ऑफिस जाने वालों पर हीटवेव का असर
ऑफिस जाने वाले लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि वे AC में रहते हैं, इसलिए उन्हें गर्मी का ज्यादा खतरा नहीं है। लेकिन असल में घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के बीच का सफर कई बार सेहत पर भारी पड़ सकता है। डॉ. मनीषा अरोड़ा की मानें, तो घर और ऑफिस से बाहर निकलते ही तेज धूप के संपर्क में आने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे सिरदर्द, थकावट और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा ऑफिस से आते जाते समय लंबे ट्रैफिक जाम में फंसना (खासतौर पर बाइक से) आपको डिहाइड्रेट कर सकता है। वहीं कुछ लोग ऑफिस में काम के चलते कम पानी पीते हैं, क्योंकि लगातार एसी में रहने से प्यास कम लगती है- ऐसे में अचानक धूप में निकलना आपके लिए खतरनाक हो सकता है।
ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए सेफ्टी टिप्स
घर से निकलने से पहले पानी जरूर पिएं
बैग में पानी की बोतल हमेशा रखें
धूप में सनग्लास और छाता इस्तेमाल करें
बाइक चलाते समय फुल कवर कपड़े पहनें
ऑफिस में काम के दौरान हर घंटे थोड़ा पानी पिएं
धूप में से आने के बाद बहुत ज्यादा ठंडा पानी तुरंत न पिएं
चाय-कॉफी जैसे कैफीन ड्रिंक्स कम लें
लंच में हल्का और पौष्टिक खाना खाएं
AC का तापमान बहुत कम न रखें
प्रेग्नेंट महिलाओं पर हीटवेव का असर
प्रेगनेंट महिलाओं पर हीटवेव का कैसा असर होता है, इसको लेकर हमने बात की रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल के स्त्री और प्रसूति विभाग की सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. साक्षी गोयल से। उनके मुताबिक, गर्मी की लहर यानी हीट वेव महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर काफी गंभीर असर डाल सकती है। इसकी बड़ी वजह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और गर्मी के प्रति शरीर की बढ़ी हुई संवेदनशीलता है। तेज गर्मी की वजह से शरीर में पानी की कमी, थकान, चिड़चिड़ापन, नींद में परेशानी, सिरदर्द और तनाव बढ़ जाता है। ऐसे में महिलाओं में एंग्जायटी, मूड स्विंग्स और इमोशनल थकान का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसके अलावा सीके बिड़ला अस्पताल के स्त्री और प्रसूति विभाग की डायरेक्टर, डॉ. तृप्ती रहेजा कहती हैं कि गर्मी और लू की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है, जिससे मूड खराब रहने लगता है और तनाव भी बढ़ सकता है। प्रेग्नेंट महिलाओं को शरीर में ज्यादा परेशानी, चलने-फिरने में दिक्कत और बच्चे की चिंता की वजह से बेचैनी और घबराहट महसूस हो सकती है। यही कारण है कि लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से सिरदर्द, चक्कर आना, लो ब्लड प्रेशर और हीट एक्सॉशन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए सेफ्टी टिप्स
खूब पानी और तरल पदार्थ पीते रहें
दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
घर को ठंडा और हवादार बनाए रखें
भरपूर आराम करें और पर्याप्त नींद लें
हल्के और ढीले कपड़े पहनें
ज्यादा गर्मी महसूस होने पर तुरंत आराम करें
शरीर में कमजोरी, चक्कर या सिरदर्द हो तो डॉक्टर से संपर्क करें
यानी अलग अलग एज ग्रुप और अलग हेल्थ कंडीशन वालों लोगों पर लू का असर अलग होता है। इसलिए आपको जान लेना चाहिए कि हीटवेव अब सिर्फ कुछ दिनों की परेशानी नहीं रह गई है। इस बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच लोगों को अपनी दिनचर्या और लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी हो गया है।इसलिए गर्मी के इन दिनों में समय पर पानी पीना, धूप से बचना, सही खानपान और शरीर के संकेतों को समझना ही गर्मी से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इन दिनों में अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। हां यदि थोड़ी सी सावधानी रखी जाए, तो भीषण गर्मी में भी खुद को हेल्दी और सेफ रखा जा सकता है।
