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Narges Mohammadi: 36 साल की सजा, 13 बार जेल और 154 कोड़े... कौन हैं नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी, जिसे ईरान में फिर किया गया गिरफ्तार

Who is Narges Mohammadi: ईरान में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर गिरफ्तार किया गया है। 53 वर्षीय मोहम्मदी 2024 से मेडिकल ग्राउंड पर अस्थायी रिहाई पर थीं। मोहम्मदी एक दिवंगत मानवाधिकार वकील की स्मृति सभा में गई थी। इस दौरान उन्हें ईरानी सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया। 53 वर्षीय मोहम्मदी 2024 से मेडिकल ग्राउंड पर अस्थायी रिहाई पर थीं।

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Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल
ईरान में नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर गिरफ्तार किया गया है।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल)

Who is Narges Mohammadi: ईरान में महिलाओं के अधिकार और उनकी आजादी की आवाज उठाने वालों का क्या हश्र होता है, उसका नरगिस मोहम्मदी एक जीता जागता सबूत हैं। नरगिस को एक बार फिर गिरफ्तार किया जा चुका है। मोहम्मदी एक दिवंगत मानवाधिकार वकील की स्मृति सभा में गई थीं। इस दौरान उन्हें ईरानी सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया।

53 वर्षीय मोहम्मदी 2024 से मेडिकल ग्राउंड पर अस्थायी रिहाई पर थीं। इससे पहले मोहम्मदी को 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है, पांच बार दोषी ठहराया जा चुका है और कुल 31 साल की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है। इतना ही नहीं उन्हें 154 कोड़े मारने की भी सजा सुनाई गई है। बता दें कि जब साल 2023 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तो उस दौरान भी वो जेल में बंद थीं।

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नरगिस मोहम्मदी को ईरान में एक बार फिर गिरफ्तार किया गया। (फोटो सोर्स: AP)

12 दिसंबर को उनके समर्थकों ने दावा किया है कि जब वह एक मानवाधिकार वकील की श्रद्धांजलि सभा में पहुंची थीं, तभी उन्हें वहां से जबरन अरेस्ट कर लिया गया।

आखिर नरगिस मोहम्मदी को फिर क्यों गिरफ्तार किया गया? इसके बारे में न तो ईरान की पुलिस और न ही सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान दिया है।

नरगिस मोहम्मदी की गिरफ्तारी पर नॉर्वे की नोबेल समिति (Nobel Peace Prize) ने इस कार्रवाई की तुरंत निंदा करते हुए गहरी चिंता व्यक्त की और ईरानी अधिकारियों से "मोहम्मदी के ठिकाने के बारे में तुरंत गरिमा सुनिश्चित करने और उन्हें बिना किसी शर्त के रिहा करने" का आह्वान किया।

न्यूयॉर्क स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान के कार्यकारी निदेशक हादी ग़ैमी ने इस गिरफ्तारी को "इस्लामिक गणराज्य द्वारा सबसे बुनियादी मानवाधिकारों पर किया गया नवीनतम हमला" बताया।

अब आइए जानते हैं कि नरगिस मोहम्मदी कौन हैं।

मोहम्मदी ईरान में महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। वो एक लेखिका और मानवाधिकार रक्षक केंद्र (डीएचआरसी) की उप निदेशक भी हैं. पिछले 30 वर्षों से ईरानी महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष में काम कर रही हैं।

इस गिरफ्तारी से पहले मोहम्मदी को 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है। पांच बार उन्हें अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और कुल 31 साल की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है। उनके पति, ताघी रहमानी, एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। वे अपने दो बच्चों के साथ पेरिस में निर्वासन में रहते हैं।

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इस गिरफ्तारी से पहले मोहम्मदी को 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है। (फोटो सोर्स: AP)

महसा अमिनी की मौत के बाद ईरान की सड़कों पर उतरी थी महिलाएं

सितंबर 2022 में 22 वर्षीय महसा अमिनी (Hijab Protest In Iran) को ईरान पुलिस ने कथित ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस कस्टडी में उसकी मौत हो गई थी।

उसे ईरान की नैतिकता पुलिस ने हिजाब ठीक से न पहनने पर प्रताड़ित किया था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इसे लेकर काफी विरोध प्रदर्शन हुआ था। तेहरान की सड़कों पर खासकर शाम के समय महिलाएं बिना हिजाब के और अपने बाल खोलकर चलती नजर आ रही हैं। इस प्रदर्शन के दौरान जिन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया उनमें से एक मोहम्मदी भी थीं।

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महसा अमिनी की मौत के बाद मोहम्मदी को भी किया गया था गिरफ्तार।(फोटो सोर्स: AP)

हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने एक संदेश में कहा कि अमिनी की मौत का दिन "ईरानी महिलाओं के खिलाफ धर्मतांत्रिक सत्तावादी शासन के उत्पीड़न" का प्रतीक बन गया है। वहीं, एविन जेल में बंद रहते हुए भी मोहम्मदी ने जेल में एक महिला के रूप में अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में लगातार रिपोर्ट करना जारी रखा। एक पत्र में मोहम्मदी ने विस्तार से बताया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में ली गई महिलाओं के साथ यौन और शारीरिक दुर्व्यवहार किया जा रहा था।

वह 'व्हाइट टॉर्चर: इंटरव्यूज विद ईरानी वुमन प्रिज़नर्स' नामक पुस्तक की लेखिका भी हैं, जिसमें उन्होंने और 12 अन्य कैदियों ने एकांत कारावास में बिताए अपने अनुभवों को दर्ज किया है, जिसे खत्म करने का उन्होंने संकल्प लिया है। जेल से बाहर आने के बाद भी उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी। वे सार्वजनिक प्रदर्शनों में एक्टिव रहीं और इंटरनेशनल मीडिया से खुलकर बात करतीं।

सवाल है कि आखिर ईरान की सरकार मोहम्मदी को ही निशाना क्यों बना रही है?

दरअसल, 52 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं। यह बात ईरान की खामेनेई सरकार को नागवार गुजर रही है। ईरान की सरकार ने उन पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा’ पहुंचाने का आरोप लगाया है।

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जेल से बाहर आकर भी नरगिस महिलाओं के अधिकारों के लिए उठाती रहीं आवाज।(फोटो सोर्स: AP)

मोहम्मदी को कब-कब किया गया गिरफ्तार?

उन्हें पहली बार 2011 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप लगा कि वो जेल में बंद कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की मदद कर रही थीं, इसी वजह से उन्हें कई साल तक जेल में रहना पड़ा। वो हमेशा से ईरान में महिलाओं के अधिकार और बराबरी के लिए आवाज उठाती रही हैं।

उन्होंने ईरान में मृत्युदंड के खिलाफ चलाए गए अभियान में भी हिस्सा लिया था. 2011 के बाद 2015 में भी उनकी गिरफ्तारी हुई और सजा बढ़ा दी गई। वे लंबे समय तक जेल में रहीं, लेकिन बाद में स्वास्थ्य कारणों की वजह से उन्हें कुछ समय के लिए अस्थायी रिहाई दी थी।

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