अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान (Iran) की आठ महिलाओं को लेकर ऐसा दावा कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया में सनसनी मच गई है। ट्रंप ने एक पोस्ट को शेयर किया है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान, इन आठ महिलाओं को फांसी देने जा रहा है। ट्रंप ने जिन महिलाओं की रिहाई के लिए वकालत की है, वो महिलाएं, हाल ही में ईरान में हुए प्रदर्शन की चेहरा थीं। ट्रंप के दावे के बाद ईरान की ओर से भी पलटवार हुआ और दावा किया गया कि ये फर्जी खबर है। अब दुनिया ईरान और ट्रंप के दावे के बीच उलझकर रह गई। ईरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाता है, ये पूरी दुनिया जानती है, लेकिन जंग के बीच फांसी, ये एक अलग ही कहानी बयां कर रही है। आइए जानते हैं सच और झूठ के बीच उलझे हुए इस मामले की पूरी कहानी...!
ट्रंप ने 8 ईरानी महिलाओं पर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के नेताओं से उन महिलाओं को रिहा करने की अपील की, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें फांसी दी जा सकती है। यह अपील ऐसे समय में आई है, जब दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम को लेकर अहम बातचीत चल रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि जो ईरानी नेता जल्द ही उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे, वे इन महिलाओं को रिहा करें। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाया जाए, क्योंकि यह बातचीत की अच्छी शुरुआत हो सकती है।
donald trump post
कौन हैं ये आठ महिलाएं?
ईरानी मूल की अमेरिकी कार्यकर्ता Masih Alinejad ने अपने X अकाउंट पर इन आठों महिलाओं के नाम साझा किए हैं। इनमें से एक महिला बीता हेम्मती बताई जा रही हैं, जिन्हें उनके पति और दो अन्य पुरुषों के साथ कथित रूप से फांसी की सजा सुनाई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर तेहरान में एक रिहायशी इमारत से सुरक्षाबलों पर कंक्रीट के ब्लॉक फेंकने का आरोप है। वहीं दूसरी महिला महबूबेह शबानी हैं, जिन पर “ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने” का आरोप लगाया गया है। बताया जाता है कि उन पर मशहद में घायल प्रदर्शनकारियों को अपनी मोटरसाइकिल से ले जाने का आरोप है। फिलहाल वह मशहद की वकीलाबाद जेल के महिला वार्ड में बंद हैं, जैसा कि मीडिया रिपोर्ट्स में मानवाधिकार संगठन हेंगाव के हवाले से कहा गया है। डायना ताहेराबादी (16) को एक नाबालिग के रूप में पहचाना गया है, जिसे जनवरी में कथित तौर पर प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दी गई है। एंसीह नेजाती, जिन्हें एक कुर्द महिला अधिकार कार्यकर्ता बताया जाता है, को 2025 की शुरुआत में फांसी की सजा सुनाई गई, ऐसी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है। इसके अलावा गजल घलंदारी, गोलनाज नराघी, वीनस हुसैन नेजाद और पनाह मोवाहेदी के नाम भी विभिन्न संगठनों द्वारा सामने लाए गए हैं, हालांकि इनके बारे में सार्वजनिक तौर पर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ईरान ने इन 8 महिलाओं के बारे में क्या दावा किया?
ईरान ने मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जनवरी में विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार की गई आठ ईरानी महिलाओं को फांसी दी जाएगी। ईरान की न्यायपालिका की आधिकारिक वेबसाइट Mizan Online ने कहा कि “ट्रंप एक बार फिर फेक न्यूज से गुमराह हुए हैं।” ईरानी न्यायपालिका ने यह भी बताया कि जिन महिलाओं के बारे में फांसी के करीब होने का दावा किया जा रहा था, उनमें से कुछ को पहले ही रिहा किया जा चुका है। वहीं अन्य पर ऐसे आरोप हैं, जिनमें दोषी साबित होने पर अधिकतम सजा जेल हो सकती है।
iran protest.
महिलाओं को फांसी पर ईरान का रिकॉर्ड कैसा है?
ईरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रूख अपनाता है, उन्हें फांसी तक की सजा देने से वह गुरेज नहीं करता है। ऐसे में अगर वो इन महिलाओं को फांसी की सजा देता है तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार कम से कम एक महिला को ईरान में फांसी दी जा चुकी है, जबकि एक अन्य महिला पर ऐसे आरोप हैं जिनमें मृत्युदंड का प्रावधान है।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरान में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों के मामलों में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होती और जनवरी के प्रदर्शनों के बाद ऐसे मुकदमों की रफ्तार और बढ़ गई है। अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency के अनुसार, विरोध के दौरान 50 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। वहीं National Council of Resistance of Iran का कहना है कि साल के पहले महीने में ही 300 से अधिक लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है।
कुल मिलाकर, ईरान पर ट्रंप द्वारा किए गए दावे सनसनीखेज तो हैं, लेकिन पूरी तरह असत्य नहीं हैं। महिलाएं कैद में हैं और फांसी के मामलों में ईरान का रिकॉर्ड खराब रहा है। इसलिए कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ, इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में ही छिपा है।
